मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने दिया इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति शासन की ओर महाराष्ट्र

 मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने दिया इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति शासन की ओर महाराष्ट्र

मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने दिया इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति शासन की ओर महाराष्ट्र

Posted by: , Updated: 08/11/19 06:02:13pm


मुंबई। महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फणनवीस शुक्रवार को राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यरी से मिलने पहुंचे। उन्‍होंने राज्‍यपाल को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया है। विधानसभा का कार्यकाल आज पूरा हो गया। अब राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन के आसार बढ़ गए हैं। फणनवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया की  मैंने राज्‍यपाल को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया है और राज्‍यपाल ने मेरा इस्‍तीफा स्‍वीकार भी कर लिया है। मैं महाराष्‍ट्र की जनता का बड़ा आभार मानता हूं। साथ ही सभी सहयोगी पार्टियों का भी आभार है। पांच साल में मेरी सरकार ने काफी विकास किया। राज्‍य में पारर्दिशता के साथ सरकार चलाने की कोशिश की। यही कारण है कि चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। राज्‍य में भाजपा का स्‍ट्राइक रेट 70 फीसदी रहा। राज्‍य में सरकार बनाने के लिए सभी विकल्‍प खुले हुए हैं।

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आप को बता दे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का नतीजा आए पखवाड़ा बीतने के बावजूद सरकार नहीं बनी है।वहीं, विधायक दल की बैठक के बाद शिवसेना ने भाजपा को सरकार बनाने की चुनौती दी थी। और अपने विधायकों को मुंबई के एक होटल में भेज दिया था

शिवसेना ने बदला विधायकों का ठिकाना

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई थी। जिसके बाद विधायकों को रंगशारदा होटल से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। शिवसेना को आशंका है कि उनके विधायकों में फूट डाला जा सकता है। इसलिए वह उन्हें महफूज ठिकाने पर लेकर जा रही है।

 विधायकों को 50, 50 करोड़ रुपये देने की हो रही पेशकश: कांग्रेस

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में पार्टी बदलने के लिए विधायकों को 25 करोड़ रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक देने की पेशकश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस विधायकों को भी इस तरह के प्रस्तावों के साथ फोन पर संपर्क किया गया है। निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि शिवसेना ने दावा किया है कि उनके एक विधायक को पार्टी बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि वह दूसरी पार्टी के विधायकों को लुभाने के प्रयास कर रही है।

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वहीं एनसीपी ने आरोप लगाया है कि भाजपा राज्य को राष्ट्रपति शासन की दिशा में ले जा रही है और इस राज्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जरिए चलाना चाहती है। एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता राज्य के इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि राज्य ने कभी भी दिल्ली के तख्त के आगे घुटने नहीं टेके। मलिक ने ट्वीट किया, ‘भाजपा महाराष्ट्र को दिल्ली से मोदी और शाह के जरिए चलाना चाहती है, इसीलिए वह राज्य को राष्ट्रपति शासन लगाने की दिशा में ले जा रही है। लोग महाराष्ट्र का यह अपमान सहन नहीं करेंगे।’

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अभी भी मुख्यमंत्री पद पर अड़ी है  शिवसेना

शिवसेना महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद साझा करने की अपनी मांग पर शुक्रवार को भी अड़ी रही और उसने भाजपा से राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए कार्यवाहक सरकार के प्रावधान का दुरुपयोग नहीं करने को कहा। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि भाजपा को शिवसेना के पास तभी आना चाहिए जब वह महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद अपनी सहयोगी पार्टी के साथ साझा करने के लिए तैयार हो।

सरकार गठन के चार समाधान 

1- कोई एक झुके : शिवसेना-भाजपा में से कोई एक जिद छोड़े तो बनेगी गठबंधन सरकार।

2- अल्पमत सरकार : 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 105 विधायक हैं। बहुमत के लिए 145 विधायक चाहिए। भाजपा निर्दलीय सहित अन्य 29 विधायकों को साथ कर ले तो संख्या 134 हो जाएगी। बहुमत परीक्षण के दौरान सदन से विरोधी दलों के 21 विधायक गैरहाजिर रहें तो संख्या 267 होगी और बहुमत का जरूरी आंकड़ा 134 हो जाएगा। हालांकि भाजपा ने इससे इनकार किया है।

3- शिवसेना में टूट : 56 विधायकों वाली शिवसेना के 45 विधायक टूटकर भाजपा का साथ दें तो संख्या दो-तिहाई से ज्यादा होगी। दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। भाजपा की संख्या 150 हो जाएगी। हालांकि भाजपा ने इससे इनकार किया है।

4- नया गठबंधन : शिवसेना (56)  एनसीपी (54) के साथ गठबंधन सरकार बनाए। कांग्रेस (44) बाहर से समर्थन दे। ऐसे में आंकड़ा 154 होगा।

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