ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक ख़त्म, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ AIMPLB, दाखिल करेगा पुर्नविचार याचिका

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक ख़त्म, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ AIMPLB, दाखिल करेगा पुर्नविचार याचिका

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक ख़त्म, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ AIMPLB, दाखिल करेगा पुर्नविचार याचिका

Posted by: , Updated: 17/11/19 06:06:14pm


लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनऊ में करीब तीन घंटा की बैठक के बाद सदस्यों ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुर्नविचार याचिका दायर करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही इन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भी उंगली उठाई है। 

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बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड के सदस्यों ने मीडिया को संबोधित किया। सैयद कासिम रसूल इलियास के साथ बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने मीडिया को संबोधित किया। इन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड पुर्नविचार याचिका दाखिल करेगा।अयोध्या मामले को लेकर ऑल इंडिया पर्सनल मुस्लिम लॉ बोर्ड रिव्यू फाइल करेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आज करीब तीन घंटा चली बैठक में 45 सदस्य मौजूद थे। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट से फैसले बोर्ड संतुष्ट नहीं है।

बाबरी मस्जिद की ऐवज में पांच एकड़ जमीन नहीं 

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक रविवार को मुमताज पीजी कॉलेज, डालीगंज में हुई। बैठक के बाद प्रेसवार्ता में बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने बताया कि मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है। इसमें हमारे साथ इंसाफ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम अयोध्या में नई मस्जिद के लिए नहीं गए थे। वहां पहले से 27 मस्जिद हैं। मुस्लिमों ने बाबरी मस्जिद पर अपने हक के लिए मुकदमा दायर किया था। जीलानी ने कहा कि बाबरी मस्जिद की ऐवज में पांच एकड़ जमीन हम नहीं ले सकते। इस्लामी शरीयत भी हमें इजाजत नहीं देती कि हम मस्जिद के बदले में जमीन या कुछ भी लें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता राजीव धवन के मुताबिक हम 30 दिन के अंदर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं। इस मामले के सभी पक्षकारों के पास यह अधिकार है।

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बैठक के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि हम अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे। मस्जिद की जमीन के बदले में मुसलमान कोई अन्य जमीन कबूल नहीं कर सकते। पर्सनल लॉ बोर्ड को मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह पर जमीन मंजूर नहीं है। जमीयतुल उलमा ए हिन्द अध्यक्ष अरशद मदनी कहते है कि मस्जिद शिफ्ट नही हो सकती। दूसरी जगह लेने का सवाल नहीं है। फैसले में कई अंतर्विरोध हैं। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड के सदस्यों ने मीडिया को संबोधित किया। इन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि माना है वहां पर नमाज पढ़ी जाती थी। इसके साथ ही वहां पर गुम्बद के नीचे जन्मस्थान का प्रमाण नहीं मिला है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि वहां पर मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई।

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जिलानी ने कहा कि शरीयत के हिसाब से जहां एक बार मस्जिद बन जाती है,  वहां मस्जिद ही रहती है। मस्जिद के बदले हम रुपया पैसा वा दूसरी जमीन नहीं ले सकते हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 5 एकड़ जमीन की पेशकश को लेने से इनकार करता है। इसके साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई ऐसा काम नही करेगा जो कोर्ट के खिलाफ हो। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जफरयाब जिलानी, महफूज उमरेन, इरशाद अहमद व इलियास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि माना है वहां पर नमाज पढ़ी जाती थी। इसके साथ ही वहां पर गुम्बद के नीचे जन्मस्थान का प्रमाण नहीं मिला है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि वहां पर मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई।वहीं, पक्षकार इकबाल अंसारी द्वारा इस मामले पर राजनीति न करने के बयान पर जीलानी ने कहा कि यह राजनीति नहीं, हक की लड़ाई है। हमें पता चला है कि अयोध्या में पुलिस प्रशासन इस फैसले के खिलाफ कुछ बोलने नहीं दे रहा। हो सकता है कि इकबाल अंसारी भी दबाव में हों।नदवा कॉलेज के स्थान पर मुमताज पीजी कॉलेज में आयोजित बैठक में जमीअत उलमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी बैठक में देर से पहुंचे और कुछ ही देर में वापस भी हो गए। इस दौरान मीडिया ने जब उनको रोका तो उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के दौरान बाहर आने वाले जमीयत उलमा-ए-हिंद के मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने का मन बनाया है। जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमको पुर्नविचार याचिका पर सुनवाई के बाद कुछ बदलाव होने की संभावना नहीं है। बैठक के बाद मौलाना मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमको मालूम है पिटिशन का हाल क्या होना है। इसके बाद भी हम रिव्यू पिटिशन दाखिल करेंगे। फिर भी यह हमारा हक है।  

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में हैदराबाद सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद, आरिफ अकील, एआईएमपीएलबी बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना जलालुद्दीन उमरी, सदस्य आसमां ज़हरा, उमरैन महफूज, महासचिव वली रहमानी, राबे हसन समेत कई बड़े मुस्लिम धर्मगुरू और नेता मौजूद थे। सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई भी प्रतिनिधि बैठक में मौजूद नहीं था। इस बैठक में बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के साथ बोर्ड उपाध्यक्ष मौलाना जलालुद्दीन उमरी, महिला विंग की संयोजक डॉ आसमा जहरा, बोर्ड के महासचिव मौलाना वाली रहमानी, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहाद उल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के प्रमुख तथा हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी तथा अध्यक्ष, जमीअत उलमा हिन्द मौलाना अरशद मदनी भी मुमताज कॉलेज पहुंचे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की मीटिंग में चारों महिला मेंबरान डॉ आसमा ज़हरा, निगहत परवीन खान, देहली की ममदुहा माजिद, आमना रिजवाना, मौलाना वाली रहमानी, जलालुद्दीन उमरी, मौलाना अतीक बस्तवी, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, असदुद्दीन ओवैसी, मौलाना अरशद मदनी जमीयत उलेमा ए हिंद, जफरयाब जिलानी, फजलुर रहीम मुजद्दीदी, ईटी मोहम्मद रशीद सांसद मुस्लिम लीग केरला, यासीन अली उस्मानी, सआदत उल्लाह हुसैनी जमात ए इस्लामी हिंद समेत अन्य मेंबरान मौजूद मौलाना राबे हसनी नदवी भी मुमताज डिग्री कॉलेज पहुंचे ।

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