JNU में छात्रों का तांडव : संसद तक छात्र संगठनों की भारी भीड़, 1200 पुलिसकर्मी तैनात

JNU में छात्रों का तांडव : संसद तक छात्र संगठनों की भारी भीड़, 1200 पुलिसकर्मी तैनात

JNU में छात्रों का तांडव : संसद तक छात्र संगठनों की भारी भीड़, 1200 पुलिसकर्मी तैनात

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 18/11/19 01:16:33pm


दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.अब स्टूडेंट्स के साथ जेएनयू शिक्षकों के अलावा विश्वभारती विश्वविद्यालय के छात्र और विभिन्न छात्र संगठनों के समर्थन में सोमवार को फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्रों ने संसद मार्च भारी भीड़ के साथ शुरू  कर दिया है। जिसको लेकर भारी पुलिस बल मौके पर मुस्तैद है वही पुलिस  अधिकरी का कहना है कि इस मार्च को मंडी हाउस से आगे बढ़ने नहीं देंगे। 

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जेएनयू गेट के बाहर तैनात है 1200 पुलिसकर्मी

जेएनयू गेट के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस ने 9 कंपनी फोर्स तैनात की है ,जिसमे  करीब 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, इनमे दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान भी शामिल है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जेएनयू छात्रों को पार्लियामेंट तक नहीं जाने दिया जाएगा। पार्लियामेंट के आसपास धारा-144 लगी हुई है। सूत्रों का कहना है कि जेएनयू छात्रों को जेएनयू के आसपास ही एक किलोमीटर के दायरे में रोकने की प्लानिंग है। हालांकि किस पॉइंट पर रोका जाएगा ये अभी फाइनल नहीं किया गया है। 

छात्रसंघ संगठनों का सांसदों से क्या है मांग?

छात्रसंघ ने सांसदों से सवाल किया है कि बढ़ी हुई फीस पर वे साथ देंगे. क्या सभी के लिए वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन की मांग करेंगे. क्या वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन पर हो रहे प्रहार को रोकेंगे? छात्रसंघ का कहना है कि छात्र आगे बढ़कर मांग करें साथ ही नीति निर्माताओं को इस बात का जवाब देने दें कि शिक्षा अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं। छात्रसंघ की ओर से जारी पर्चे में कहा गया है कि फरवरी 2019 के सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेकेंड्री और हायर से 94,036 करोड़ रुपयों का इस्तेमाल नहीं किया गया। 

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 सीएजी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 7298 करोड़ रुपये रिसर्च और विकास कार्यों में खर्च होने थे जो नहीं हुए.और वही छात्रों का दावा है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी ने पब्लिक फंडेड एजुकेशन के दरवाजे विदेशी और कॉर्पोरेट शिक्षा के लिए बंद कर दिए हैं. क्या इसी वजह से ऐसा हुआ है। 5.7 लाख करोड़ बैड लोन और 4 लाख करोड़ टैक्स रिबेट्स कॉर्पोरेट को दिए गए। लेकिन पब्लिक फंडेड एजुकेशन के लिए कुछ नहीं दिया गया है।

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