फिर भी तुम दिल्ली मत जाइयो

फिर भी तुम दिल्ली मत जाइयो

फिर भी तुम दिल्ली मत जाइयो

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 18/11/19 01:30:49pm


सहीराम
तुम दिल्ली मत जाइयो। यह ठीक है कि दिल्ली देश की राजधानी है। वहां सत्ता के गलियारे हैं। लंबे-चौड़े तो पता नहीं कितने हैं, पर घुप्प और अंधेरे जरूर हैं। रहस्यमयी भी हैं। उन गलियारों तक अगर पहुंच हो जाए तो सचमुच पौ-बारह है। पर तुम कोई सत्ता के दलाल नहीं हो कि वहां तक तुम्हारी पहुंच हो जाएगी। तुम न नेता हो, न ठेकेदार हो और न अफसर, फिर सत्ता के गलियारे तक कैसे पहुंचोगे।

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यह ठीक है कि तुम्हारे गांव में, शहर में, राज्य में रोजगार नहीं है और दिल्ली में रोजगार है। फिर भी तुम दिल्ली मत जाइयो। क्योंकि वहां रहोगे कहां? अब वहां झुग्गी-झोपडिय़ां नहीं बसायी जाती। वहां सिर्फ अवैध कालोनियां बसायी जाती हैं, जिन्हें देर-सवेर वैध होना ही है, फिर भी वहां रहना इतना आसान थोड़े ही है। यह ठीक है कि वहां मेट्रो है। पर वह जनता की सवारी नहीं है। बड़ी महंगी है। बसों से दोगुनी, तीन गुनी और चार गुनी तक। बसें सस्ती हैं, बल्कि महिलाओं के लिए तो मुफ्त हैं और हो सकता है छात्रों और बुजुर्गों के लिए जल्दी ही मुफ्त हो जाएं। पर वे हैं कहां? यह सच है कि दिल्ली में बिजली सस्ती है और पानी मुफ्त। फिर भी तुम दिल्ली मत जाइयो क्योंकि दिल्ली पल-पल रूप बदलती है। कभी दिल्ली अपराध की राजधानी हो जाती है तो कभी बलात्कार की राजधानी हो जाती है। जब निर्भया कांड हुआ था, सिर्फ तभी यह बलात्कार की राजधानी घोषित नहीं हुई थी, उसके बाद भी कई बार घोषित हुई है क्योंकि निर्भया कांड न जाने कितने रूपों में दोहराया जा चुका है। और अपराध की राजधानी तो अभी पिछले ही दिनों घोषित थी जब प्रधानमंत्री की भतीजी से झपटमारी हो गयी थी। यह तो अच्छा हुआ कि जैसे यूपी के मंत्री की चोरी हुई भैंसों को पुलिस फौरन ढ़ूंढ़ निकालती है वैसे ही दिल्ली पुलिस ने भी प्रधानमंत्रीजी की भतीजी का सामान फौरन ढ़ूंढ़ निकाला, जिस पर जलकुकड़ों ने वैसे ही शिकायत की, जैसे यूपी सरकार के विरोधी शिकायत करते थे। तो तुम इस पल-पल रूप बदलती दिल्ली मत जाइयो।

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अपराध और बलात्कार से बच भी गए तो फिर यहां सांस घुटती है। यहां की हवा ज़हरीली है, आसमान का रंग नीला नहीं काला है क्योंकि यहां बस काला धुआं है। यहां ऐसी सांस घुटती है कि बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। बाबू लोग दफ्तर नहीं जा पाते। पैसे वाले बाजार नहीं जा पाते। सिर्फ गरीब काम पर जा सकते हैं। जहर पीकर भी। हालांकि, देखा जाए तो यह जहर कहां नहीं है। एनसीआर में तो है ही, हरियाणा में है, पंजाब में है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। बल्कि पाकिस्तान में भी है। देशद्रोहियों को पाकिस्तान भेजकर भी क्या करेंगे। हालात तो बराबर ही हैं। इससे अच्छा तो उन्हें यहीं रख लो।
 

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