पीएम मोदी ने संसद शीतकालीन सत्र के दौरान एनसीपी को सराहा, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मच गई हलचल

पीएम मोदी ने संसद शीतकालीन सत्र के दौरान एनसीपी को सराहा, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मच गई हलचल

पीएम मोदी ने संसद शीतकालीन सत्र के दौरान एनसीपी को सराहा, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मच गई हलचल

Posted by: , Updated: 18/11/19 05:04:50pm


संसद का शीतकालीन सत्र इस बार ऐतिहासिक माना जा है, राज्यसभा में सोमवार को 250वें सत्र की शुरुआत हुई.इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इन 250 सत्रों के बीच जो यात्रा चली है, उनको नमन करता हूं। फ़िलहाल पीएम मोदी अपने  आखिर सम्बोधन में कुछ ऐसा कहा दिया जिसके कारण राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। 

दरअसल सोमवार को 250वें सत्र के दौरान जब पीएम मोदी संबोधित कर रहे थे,तभी उन्होंने शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी की तारीफ कर  कहा, ‘हमें सदन में रुकावटों की बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए, एनसीपी-बीजेडी की विशेषता है कि दोनों ने तय किया है कि वो लोग सदन के वेल में नहीं जाएंगे और  कहा कि हम सभी राजनीतिक दलों को सीखना होगा कि ये नियम का पालन करने के बावजूद भी इनके विकास में कोई कमी आई है, हमारी पार्टी बीजेपी को भी ये सीखना चाहिए  और हमें इन पार्टियों का धन्यवाद करना चाहिए। जब हम विपक्ष में थे, तो भी ये काम करते थे लेकिन इन दो पार्टियों ने इस उदाहरण को तय किया है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में जिस तरह सरकार गठन को लेकर असमंजस की स्थिति चल रही है, उस बीच पीएम मोदी द्वारा एनसीपी की तारीफ करना एक संदेश देता है।बीजेपी का साथ छोड़ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ आने को तैयार है लेकिन अभी तक सरकार गठन पर कोई फाइनल तस्वीर साफ नहीं दिख रही है। 

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बता दें कि आज ही शरद पवार महाराष्ट्र से दिल्ली आए हैं, और सुबह उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया। जबकि शाम को वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात  कर महाराष्ट्र में सरकार गठन पर चर्चा करेंगे जबकि इससे पहले शरद पवार ने बयान दिया था कि बीजेपी-शिवसेना एक साथ चुनाव लड़े थे,जो अपना रास्ता तय करें। पीएम ने कहा कि देश में जो लोग लेखन के शौकीन हैं जिसमें संविधान निर्माताओं के बीच में चर्चा चल रही थी कि सदन एक हो या दो हो, लेकिन अनुभव कहता है कि ये सुविधा कितनी बढ़िया है। अगर निचला सदन जमीन से जुड़ा हुआ है, तो ऊपरी सदन दूर तक देख सकता हैं राज्यसभा में प्रधानमंत्री बोले कि ऊपर वाला दूर तक देख सकता है। इस सदन में इतिहास बनाया है और बनते हुए देखा है, कई गणमान्य दिग्गज महापुरुषों ने इस सदन की अगुवाई की है। उन्होंने कहा कि सदन की विशेषता है कि उसका स्थायित्व और उसकी विविधता। 

बाबा साहेब ने की थी इस सदन से शुरुआत

पीएम बोले कि राज्यसभा कभी भंग नहीं हुई है और ना होगी, यहां राज्यों का प्रतिनिधित्व दिखता है। हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना आसान नहीं होता है, लेकिन देशहित में उनकी उपयोगिता कम नहीं होती है। ये ऐसी जगह है जहां पर ऐसे लोगों का भी स्वागत होता है। देश ने देखा है कि वैज्ञानिक, कला, लेखक समेत कई गणमान्य यहां आए हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बाबा साहेब अंबेडकर हैं किसी कारण से उन्हें लोकसभा में पहुंचने नहीं दिया लेकिन वह राज्यसभा में आए। 

राज्यसभा में प्रधानमंत्री बोले कि लंबे समय तक विपक्ष कम था, लेकिन आज ऐसा कम ही देखने को मिलता था. पीएम बोले कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने कहा था कि हमारा विचार, व्यवहार और सोच ही दो संसदीय वाली हमारी संसदीय प्रणाली के औचित्य को साबित करेगी। संविधान का हिस्सा बनी इस सदन की परीक्षा हमारे काम से होगी, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अपने सोच से देश को इस सदन का औचित्य साबित करें। 

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों का कल्याण करना हमारा काम है, संघीय ढांचे देश के विकास के लिए सबसे अहम शब्द है। केंद्र सरकार जो नीतियां तैयार करती हैं, उन्हें राज्य सरकार किस प्रकार आगे बढ़ाएगी वो ये ही सदन तय करता है। 

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सदन नहीं बनेगा कभी सेकेंडरी हाउस

जब इस सदन के 200 सत्र हुए, तब अटल बिहारी वाजपेयी ने एक संबोधन दिया था। उन्होंने कहा था कि हमारे संसदीय लोकतंत्र की शक्ति बढ़ाने के लिए दूसरा चेंबर मौजूद है, इसलिए इसके सेकंडरी हाउस बनाने की गलती ना करें। पीएम ने कहा कि ये सदन कभी सेकेंडरी हाउस नहीं, बल्कि सपोर्टिव हाउस बने रहना चाहिए। अटल जी ने अपने संबोधन में कहा था कि एक नदी का प्रवाह तभी तक अच्छा रहता है, जबतक उसके किनारे मजबूत होते हैं। भारत की संसदीय प्रवाह के लोकसभा-राज्यसभा दो किनारे हैं। अगर ये मजबूत रहेंगे तो लोकतंत्र फलेगा-फूलेगा। पीएम मोदी बोले कि राज्यसभा चेक एंड बैलेंस का विचार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। बैलेंस और ब्लॉकिंग के बीच अंतर रखना जरूरी है, सदन तीखे विवाद के लिए होना चाहिए। 

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