NGT की बड़ी कार्रवाई- पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर प्रदेश सरकार पर लगाया 10 करोड़ का जुर्माना

NGT की बड़ी कार्रवाई- पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर प्रदेश सरकार पर लगाया 10 करोड़ का जुर्माना

NGT की बड़ी कार्रवाई- पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर प्रदेश सरकार पर लगाया 10 करोड़ का जुर्माना

Posted by: Mrs. Pooja Jha, Updated: 19/11/19 02:53:52pm


गंगा को बचाने सरकार ने गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए कई योजना बनाए है। लेकिन फिर भी गंगा बचाव पर काम नहीं किया जा रहा है। जिस पर एनजीटी ने सरकार को गंगा को बचाने, लोगों को स्वच्छ पानी और स्वस्थ वातावरण देने को आदेश दिया है।  आदेश में कहा है कि पिछले 43 वर्षों से कानपुर नगर और देहात के दो स्थानों पर भूमिगत जल प्रदूषित किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने के लिए एनजीटी ने प्रदेश सरकार पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया है। एनजीटी प्रमुख एके गोयल ने आदेश में कहा है कि जूही कानपुर के राखी मंडी क्षेत्र और कानपुर देहात में रनिया क्षेत्र के खान चांदपुर गांव का भूमिगत जल लापरवाही की वजह से विषैला हो गया।

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इस संबंध में पहले भी चेतावनी दिए जाने के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई। आदेश में यह भी कहा गया है कि जब जल निगम की तरफ से सीवर लाइन की सफाई के लिए गंगा में नाले खोले जाने की बात प्रदेश सरकार को बताई गई, उस समय भी जाजमऊ की 122 टेनरियां संचालित थीं।

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यह भी पर्यावरण के नियमों के विरुद्घ है। इसकी वजह से काफी मात्रा में टेनरियों से प्रदूषित पानी सिंचाई के नाम पर बाहर निकाला जाता रहा। इससे भी गंगा और भूजल के पानी में क्रोमियम का जहर घुलता रहा। इसके अलावा यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी लापरवाही के लिए एक करोड़ राशि जुर्माने के तौर पर देने को कहा गया है।

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गंगा में सीवरेज डालने पर जताई आपत्ति

एनजीटी ने यह भी पूछा है कि कानपुर नगर के जूही राखी मंडी में क्रोमियम कचरे से प्रभावित क्षेत्र में पाइप लाइन से पेयजल आपूर्ति की गई तो खानचंद्रपुर में ऐसा क्यों नहीं हुआ। एनजीटी ने जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा नालों की सफाई के नाम पर गंगा में सीधे सीवरेज डाले जाने पर आपत्ति जताई है। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राखीमंडी और खानचंद्रपुर में 43 वर्षों की समस्या, क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर ध्यान नहीं दिया गया।

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शासन स्तर से लापरवाही की गई। यह अधिकारियों की विफलता की तस्वीर पेश करती है। खानचंद्रपुर मामले में यूपीपीसीबी ने भी जिम्मेदारी नहीं निभाई। पर्यावरण क्षति का आकलन 2019 में किया गया। इस पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गंगा को प्रदूषित करने पर जल निगम पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। शासन को आदेश दिया कि वह दोषी अधिकारियों से जुर्माना वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। शासन जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कर सकता है।

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