तुम बिन सूना-सूना है जहान

तुम बिन सूना-सूना है जहान

तुम बिन सूना-सूना है जहान

Posted by: , Updated: 22/11/19 12:28:51pm


ओम वर्मा
उस दिन अचानक मुझे यूं लगा कि जैसे पृथ्वी ने घूमना, मच्छरों ने भिनभिनाना, भंवरों ने गुनगुनाना, तारों ने टिमटिमाना और जुगनुओं ने जगमगाना सस्पेंड कर दिया है। जैसे इन सबसे इनका यह गुण, यह पहचान अनुच्छेद 370 की तरह वापस ले ली गई है। कुछ पल के लिए सारी दुनिया जैसे थम सी गई है! मेरे वो सारे मित्र, जिनसे मैं आज तक कभी मिला नहीं, मुझे मेरे स्मार्टफ़ोन खरीदने के दिन से लेकर कल तक सूर्योदय से पहले 'गुड मॉर्निंग, सूरज सिर पर चढ़े उससे पहले 'गुड नून, फिर तीसरे पहर का वक्त होते ही 'गुड आफ्टर नून धरधरी बखत शुरू होते ही 'गुड इवनिंगÓ और मेरे बिस्तर में लेटायमान होने से पहले 'गुड नाइट करके मुझे पर इस फ़ानी दुनिया में मायामोह के बंधनों में बांध लिया करते थे, आज अचानक कहां चले गए? तमाम असाध्य रोगों के एक से एक रामबाण उपचार बताने वाली तमाम पोस्ट आज क्यों नहीं आ रही हैं?

 

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क्या आज मुझे कोई नहीं बताएगा कि मुझे क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? कोई यह समझाने का प्रयास नहीं करेगा कि उस परिवार के पुरखे मुस्लिम थे या चाचा जी के फलानी विदेशी महिला के साथ संबंध थे? क्या आज मुझे कोई प्रेमचंद की आज तक कभी नहीं पढ़ी-सुनी गई कविता-शायरी पढऩे को नहीं मिलेगी? क्या आज मैं अपनी तमाम महिला मित्रों को उनके नए डीपी पर लाइक का अंगूठा नहीं दिखा सकूंगा और कमेंट बॉक्स में 'बहुत सुंदर लग रही हो जैसे दिली उद्गार व्यक्त नहीं कर सकूंगा?

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मुझे लगा कि कहीं फिल्म 2.0 की तरह किसी पक्षीराजन ने ऐसा कोई रोबोट बनाकर नहीं छोड़ दिया है जो फिल्म में मोबाइल उड़ाता था और आज सबके मोबाइल हेंग कर रहा हो? यहां मेरी मदद के लिए न तो कोई 'नीला है, न 'चिट्टी और न ही कोई वसीगरन यानी रजनीकांत ही है। और इससे पहले कि मैं अपने मोबाइल पर हथोड़ा चला देता, सेटिंग में देखता हूं कि 'सिम सस्पेंडेड है। टीवी न्यूज़ से पता चलता है कि 'लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए आज के दिन सरकार ने खुद इंटरनेट सेवा अस्थाई रूप से बंद कर रखी है। दिल को राहत तो मिली, फिर भी यह सोचकर वह बैठा जा रहा है कि अगर सचमुच किसी दिन किसी पक्षीराजन का दिमाग सटक गया और उसने हमारे मोबाइल उड़वा दिए, उस दिन सारे ग़म के मारे आखिर कहां जाएंगे?

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