बेहतर जीने की राह दिखाती मृत्यु

बेहतर जीने की राह दिखाती मृत्यु

बेहतर जीने की राह दिखाती मृत्यु

Posted by: , Updated: 23/11/19 02:52:07pm


शमीम शर्मा
कहीं पढऩे को मिला कि मरने के बाद दिल दस मिनट, त्वचा पांच दिन, आंखें चार घण्टे, दिमाग बीस मिनट और हाड़ पांच दिन तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। शरीर विज्ञान की इस गिनती को छोड़ दिया जाये तो कहा जा सकता है कि व्यक्ति के कर्म, विचार और लेखन तो लम्बे समय तक जीवित रहते हैं। या यूं कह सकते हैं कि हमेशा जिंदा रहते हैं।

इसे भी पढ़ें- सत्ता के लिए भतीजे ने चाचा को धोखा दिया:  संजय राउत 

मेरे ख्याल से दुनिया में तीन तरह के लोग हैं- आस्तिक, नास्तिक और वास्तविक। एक विचार तो इन सबके मन में ज़रूर पैदा होता होगा कि मौत के बाद क्या है सबकी अपनी-अपनी धारणायें हैं या यूं कहें कि वहम हैं। सच्चाई यह है कि लोग अक्सर मृत्यु से डरते हैं जबकि मौत तो मिनटों का खेल है। आफत तो जिंदगी की है जो सारी उम्र भागादौड़ी करवाती है। एक बार की बात है कि एक लड़का अपनी प्रेयसी को घुमाने के नाम पर श्मशान घाट ले गया। लड़की ने हैरानी भरे लहज़े में पूछा- अरे यहां क्यों ले आये मुझे लड़के का जवाब था कि पगली! यहां आने को तो सब लोग तरसते हैं। एक महान विचारक का कथन है कि हमने श्मशान घाट नगर की परिधि से दूर बनाकर मानवता का भारी नुकसान कर लिया है क्योंकि यदि ये घाट हमारे समीप हों और आते-जाते श्मशान घाट के दर्शन हों तो व्यक्ति सचेत रहता है कि जीवन का अंतिम सत्य यही स्थान है, इसलिये आपाधापी करने की ज़रूरत नहीं है। मौत के प्रति जागरूक व्यक्ति सद्कर्म में तल्लीन रहता है। पर हम पूरी उम्र ही मृत्यु की ओर पीठ करके जीते हैं। यह और बात है कि डरपोक आदमी अपनी मौत से पहले ही कई-कई बार मर लेता है।

इसे भी पढ़ें-राम मंदिर निर्माण के लिए 51 हजार ईंटें दान करेगा भट्ठा मालिक, हर ईट पर लिखा होगा राम 

दिल के लेन-देन में धड़कनें तेज होकर सुरीली हो जाती हैं जबकि मृत्यु धड़कनों के धागे को तोड़ देती है। सिर्फ प्रगाढ़ प्रेम में ही इनसान अपनी महबूबा को कह सकता है कि मैं तेरे लिये मर सकता हूं। कितनी ही बार दो प्रेमी हाथ पकड़कर मौत को गले लगा भी लेते हैं। तब लगता है कि मौत कितनी सरल है और जीवन कितना जटिल है। यह और बात है कि कोई नहीं चाहता कि प्रेम में निमग्न कोई जन अपनी जान गंवाये। सांसें खत्म हो जायें और ख्वाहिशें शेष रह जायें तो हम मौत का आलिंगन करते हैं। और अगर ख्वाहिशों का खात्मा हो जाये और सांसें बकाया हों तो उसे मोक्ष कहा जाता है। मौत और जिंदगी की बातों के बीच आज कोई लतीफा सूझ ही नहीं रहा।

जुड़े हमारे फेसबुक पेज से- https://www.facebook.com/firsteyenws/
ट्विटर पर हमें फॉलो करें- https://twitter.com/firsteyenewslko
सब्सक्राइब करें हमारा यूट्यूब चैनल-https://www.youtube.com/channel/UChwj7_fqaFUS-jghSBkwtDw

Recent Comments

Leave a comment

Top