Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट में कल सुबह 10.30 बजे दोबारा होगी सुनवाई, सभी पक्षों को किया नोटिस जारी

Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट में कल सुबह 10.30 बजे दोबारा होगी सुनवाई, सभी पक्षों को किया नोटिस जारी

Maharashtra: सुप्रीम कोर्ट में कल सुबह 10.30 बजे दोबारा होगी सुनवाई, सभी पक्षों को किया नोटिस जारी

Posted by: , Updated: 24/11/19 01:09:43pm


महाराष्ट्र मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कल सुबह 10.30 बजे दोबारा सुनवाई होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इससे पहले शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को आज ही फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में भाजपा के लिए पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि रविवार को सुनवाई क्यों हो रही है। शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस की ओर से महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले (देवेंद्र फड़नवीस को 23 नवंबर को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का फैसला) के खिलाफ संयुक्त याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका पर न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ सुनवाई कर रही है।

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कपिल सिब्बल: हम कल ही बहुमत साबित करने को तैयार हैं. इन लोगों को वक्त नहीं देना चाहिए. महाराष्ट्र के लोगों को उनके हित में सरकार की जरूरत है। कोर्ट को इस देरी की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्हें अपना बहुमत साबित करना चाहिए। हम कल उन्हें दिखा सकते हैं। 7 बजे हमने सरकार बनाने का दावा किया था
तुषार मेहता: ये लोग हाईकोर्ट क्यों नहीं गए। इन्होंने हाईकोर्ट को क्यों बाइपास किया।

आज या कल करवाएं फ्लोर टेस्‍ट
एनसीपी-कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा है कि महाराष्‍ट्र सरकार का बहुमत परीक्षण आज या कल ही करवाया जाए। उन्‍होंने 1998 के यूपी और 2018 के कर्नाटक के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी तत्‍काल बहुमत परीक्षण के आदेश दिए हैं।

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अभिषेक मनु सिंघवी ने दी यह दलील

एनसीपी-कांग्रेस की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा,'राज्‍यपाल का दायित्‍व है कि प्रथम दृष्‍टया बहुमत की संतुष्टि किसी हस्‍ताक्षरित लिखित दस्‍तावेज के आधार पर करे जिसका भौतिक सत्‍यापन हुआ हो। यही मापदंड है। उन्‍होंने उप-मुख्‍यमंत्री बने अजीत पवार की शपथ पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल 42-43 सीटों के सहारे अजीत पवार डिप्टी सीएम कैसे बने? यह लोकतंत्र की हत्या है।
 कानूनी पेंच फंसा है

कोर्ट में महाराष्‍ट्र की सरकार के गठन के खिलाफ दायर याचिका पर यह सवाल उठा है कि यह याचिका चलने योग्‍य भी है या नहीं। कारण यह है कि याचिका में फंडामेंटल राइट्स का हवाला दिया गया है, जबकि कोर्ट ने कहा है कि फंडामेंटल राइट्स दलों के नहीं होते।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की संयुक्त याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच सुनवाई कर रही है। इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने को चुनौती दी गई है।

भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई है। भाजपा की और से मुकुल रोहतगी पक्ष रखेंगे। वहीं कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी की ओर से कपिल सिब्ब्ल समेत अन्य सीनियर वकील रहेंगे। इनकी मांग है कि तत्काल विधानसभा का सत्र बुलाकर भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए कहा जाए।

सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के वकील देवदत्त कामत ने कहा है कि हमने सर्वोच्च अदालत से निवेदन किया है कि वह तत्काल फ्लोर टेस्ट के लिए निर्देश दें। हम आशावान हैं कि सुप्रीम कोर्ट हमारी बातों पर गौर करेगा। वहीं कांग्रेस नेता एसी वेणुगोपाल ने भी कहा है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने सभी मापदंडों और नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने बगैर किसी सत्यापन के बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुला लिया। हम इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए हैं।

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बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले एक महीने से जारी सत्ता संघर्ष का शनिवार सुबह बड़ा ही नाटकीय पटाक्षेप हुआ। भाजपा ने सियासी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देते हुए सत्ता की दौड़ में आगे निकलते दिख रहे राकांपा-कांग्रेस और शिवसेना के बनने वाले गठबंधन को पछाड़ दिया। शुक्रवार देर रात भाजपा ने राकांपा के अजीत पवार से 'डील" फाइनल की। सुबह 5.47 बजे राष्ट्रपति शासन हटाने का एलान हुआ और आनन-फानन में भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री तथा राकांपा के अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महज कुछ ही लोगों की मौजूदगी में शपथ दिलाई।

महाराष्ट्र को खिचड़ी सरकार की जरूरत नहीं : फडणवीस

शपथ ग्रहण के बाद फडणवीस ने कहा- 'लोगों ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था लेकिन शिवसेना ने चुनाव परिणाम के बाद दूसरी पार्टियों के साथ गठजोड़ करने की कोशिश की। महाराष्ट्र को 'खिचड़ी" नहीं बल्कि स्थिर सरकार की जरूरत है। वहीं अजीत पवार ने कहा- '24 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से कोई पार्टी सरकार नहीं बना पा रही थी। महाराष्ट्र में किसानों की दिक्कतों समेत कई अन्य समस्याएं हैं। इसलिए हमने स्थिर सरकार बनाने का फैसला किया।

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