दिल की बीमारी में जरूरी नहीं हर किसी के लिए बायपास सर्जरी या स्टेंट 

दिल की बीमारी में जरूरी नहीं हर किसी के लिए बायपास सर्जरी या स्टेंट 

दिल की बीमारी में जरूरी नहीं हर किसी के लिए बायपास सर्जरी या स्टेंट 

Posted by: Mrs. Pooja Jha, Updated: 27/11/19 03:18:50pm


अमेरिकी सरकार की नई रिसर्च के मुताबिक धमनियों (आर्टरीज़) के ब्लॉकेज हटाने के लिए की जाने वाली बायपास या स्टेंट जैसे विकल्प सभी मरीजों के लिए जरूरी नहीं है। कई मरीजों को तो केवल दवाओं से भी ठीक किया जा सकता है। गंभीर ब्लॉकेज या हार्ट अटैक के मामले में ही सर्जरी या स्टेंट के विकल्पों को कारगर माना गया है। 

इस रिसर्च में पाया गया कि ब्लॉक हो चुकी धमनियों के लिए सर्जरी की बजाय केवल दवाओं पर निर्भर लोगों को सर्जरी कराने वालों की तुलना में एक भी हार्ट अटैक नहीं आया। यह घोषणा दशकों पुरानी जानकारी के लिए किसी खुली चुनौती से कम नहीं है। पांच हजार से अधिक लोगों पर सात साल के दौरान किए गए अध्ययन में पाया गया कि बायपास और स्टेंट के कारण मरीजों को केवल सीने में दर्द यानी एंजाइना से ही निजात मिलने के कारण यह इतने ज्यादा लोकप्रिय हैं।

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सोच बदलने वाली रिसर्च

बोस्टन यूनिवर्सिटी में कैथ लैब व इंटरवेंशनल कार्डियालॉजी की निदेशक डॉ. एलिस जैकब्स ने माना कि यह ‘हमारी चिकित्सकीय सोच को बदलकर रख देगा।’ उन्होंने कहा कि आम सोच यह रही है कि ब्लॉक का इलाज करने से मरीज को बेहतर महसूस होगा। इस रिसर्च के लिए किए गए 5179 लोगों पर किए गए ट्रायल्स पर 100 मिलियन डॉलर खर्च किए गए। इसके निष्कर्ष अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की फिलाडेल्फिया में हुई सालाना बैठक में पेश किए गए। इसके साथ ही एक बार फिर धमनियों के ब्लॉकेज के इलाज के तौर-तरीकों को लेकर फिर विशेषज्ञों में दरार देखने को मिल रही है। उल्लेखनीय है कि स्टेंट्स और धमनियों को साफ करने वाले उपकरणों पर काफी अरसे से सवाल उठाए जाते रहे हैं। ताजा रिसर्च, जिसका नाम इशेमिया है, अब तक का सबसे बड़ा, गहन और नियंत्रित रिसर्च था।

करोड़ों की हो सकती है बचत

अध्ययन का नेतृत्व करने वाली एनवाययू लेंगोन की कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जूडिथ हॉचमैन के अनुमान के मुताबिक हर साल स्थिर कोरोनरी आर्टरी डिसीज वाले पांच लाख मरीजों की पहचान की जाती है। हॉचमैन मानती हैं कि केवल बेवजह की स्टेंटिंग रोककर ही हर साल लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ रु. बचाए जा सकते हैं। कई बार तो ऐसे लोगों को भी स्टेंट लगा दिए जाते हैं, जिन्हें सीने में दर्द की कोई शिकायत ही नहीं होती। उनकी स्पष्ट राय है कि स्टेंट या बायपास केवल उन्हीं लोगों के लिए होता है जिनकी ब्लॉकेज की समस्या गंभीर रुप ले चुकी हो। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के कार्डियोलॉजिस्ट और अध्ययन के सह-लेखक डॉ. डेविड मेरोन के अनुसार स्टेंट लगाने और बायपास पर अमेरिका में औसतन क्रमशः 17 लाख रु.और 32 लाख रु. का खर्च आता है। हॉचमैन का कहना है, लेकिन अगर आपको हार्ट अटैक आ चुका हो तो फिर स्टेंट आपकी जिंदगी बचा सकता है।

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दिशानिर्देशों में मिलेगी जगह

ह्यूस्टन के बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के डायरेक्टर कार्डियेक केयर डॉ. ग्लेन लेविन के मुताबिक, ‘‘यह एक विलक्षण और महत्वपूर्ण ट्रायल है।’’ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की दिशानिर्देश समिति के सदस्य लेविन ने कहा कि अध्ययन के नतीजों को उपचार संबंधी दिशानिर्देशों में जगह दी जाएगी। एक डॉक्टर ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में इस खुलासे पर कहा कि अगर ऐसा होता है तो मरीजों का सालाना 775 मिलियन डॉलर तक बच सकता है। अनेक कार्डियोलॉजिस्ट उपचार के तरीके को केवल इसलिए नहीं बदलना चाहते क्योंकि धमनियों को खोलने के लिए स्टेंट लगवाने वाले मरीजों द्वारा तत्काल राहत मिलने की बात कही जाती है।

अध्ययन का यह था विषय

दिल के मरीजों की धमनियों में रक्त का प्रवाह सामान्य करने के लिए सर्जरी क्या ज्यादा परंपरागत एस्पिरिन, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं और अन्य तरीकों से बेहतर विकल्प है?

पहले के दो अध्ययन

इनमें पाया गया कि मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ धमनियों की सफाई और स्टेंटिंग या बायपास सजर्री से हार्ट अटैक और मौत की आशंका में गैर-सर्जरी उपचार पद्धति की तुलना में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आती। 

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वक्त तो लगेगा

विशेषज्ञों की राय में अध्ययन बहुत अच्छी तरह से किया गया और उसके निष्कर्षों की अनदेखी मुश्किल होगी। फीनिक्स की यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन हार्ट इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष प्रसाद का कहना है कि अध्ययन के निष्कर्षों पर अमल में कुछ वक्त लग सकता है। 

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