नागरिकता कानून के जरिये भारत ने दिया अमेरिकी धार्मिक आयोग को करारा जवाब, अमेरिका ने संशोधन बिल पर जताई नाराजगी

नागरिकता कानून के जरिये भारत ने दिया अमेरिकी धार्मिक आयोग को करारा जवाब, अमेरिका ने संशोधन बिल पर जताई नाराजगी

नागरिकता कानून के जरिये भारत ने दिया अमेरिकी धार्मिक आयोग को करारा जवाब, अमेरिका ने संशोधन बिल पर जताई नाराजगी

Posted by: Mrs. Preeti K., Updated: 10/12/19 06:26:03pm


अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक पर चिंता जाहिर की है। अमेरिका का कहना है कि लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल के लिए कोई भी धार्मिक परीक्षण किसी राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। इस मामले पर पलटवार करते हुए  भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक पर अमेरिकी आयोग का बयान न तो सही है, और न ही इस बयान की कोई जरूरत थी। मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि नागरिकता विधेयक और एनआरसी किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता नहीं छीनता है। अमेरिका सहित हर देश को अपने यहां की नीतियों के तहत नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने का हक है।

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इस मामले पर रविश कुमार का कहना है कि अमेरिकी आयोग की ओर से जिस तरह का बेतुका बयान दिया गया है, वह हैरानियत की कोई बात नही है। हालांकि, ये भी निंदनीय है कि संगठन ने जमीनी स्तर पर कम जानकारी होने के बाद भी इस तरह का बयान दिया है। यह संशोधन विधेयक उन धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देता है, जो पहले से ही भारत में आए हुए हैं। भारत ने यह फैसला मानवाधिकार को देखते हुए लिया है। इस प्रकार के फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए न कि उसका कोई विरोध किया जाना चाहिए। 

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संशोधन विधेयक को लेकर अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 'गलत दिशा में बढ़ाया गया एक खतरनाक कदम' है और यदि यह भारत की संसद में पारित होता है तो भारतीय नेतृत्व के खिलाफ प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

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