यूपी कैबिनेट का फैसला:अयोध्या दीपोत्सव को राज्य मेला का दर्जा, फिल्म सांड की आंख टैक्स फ्री

यूपी कैबिनेट का फैसला:अयोध्या दीपोत्सव को राज्य मेला का दर्जा, फिल्म सांड की आंख टैक्स फ्री

यूपी कैबिनेट का फैसला:अयोध्या दीपोत्सव को राज्य मेला का दर्जा, फिल्म सांड की आंख टैक्स फ्री

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 22/10/19 02:25:36pm


लखनऊ,फर्स्ट आई न्यूज़ डेस्क


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में उत्तरप्रदेश कैबिनेट की बैठक में कुल 13 निर्णय पर मुहर लगी। जिसमे अयोध्या  दीपोत्सव मेला को राज्य मेला का दर्जा तथा फिल्म सांड की आंख को टैक्स फ्री करना भी शामिल है।लोकभवन में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। अयोध्या में दीपोत्सव मेला को राज्य मेला का दर्जा दिया गया। मेले के तहत झांकी सहित सभी कार्यक्रमों का ऑडिट किया जाएगा। सरकार इस मेले को हर साल धूमधाम से आयोजित करती है। राज्य मेला का दर्जा मिलने के बाद मेले पर आने वाला पूरा खर्च सरकार उठाएगी। अब बजट में इसकी अलग से व्यवस्था होगी। इससे पहले मीरजापुर के विंध्याचल शक्ति पीठ, नैमिषारण्य का मां ललिता देवी व देवीपाटन का पाटेश्वरी शक्ति पीठ मेला को भी प्रदेश सरकार राज्य मेला का दर्जा दे चुकी है। प्रांतीयकरण होने के बाद प्रदेश सरकार मेले के लिए बजट की व्यवस्था कर सकेगी। इससे श्रद्धालुओं को भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।कैबिनेट बैठक में पेयजल के लिए अमृत योजना के तहत रायबरेली योजना फेज-तीन को मंजूरी दी गई। इसके लिए 187.17 करोड़ रुपया का का अनुमोदन किया गया है। जिसमें 50 प्रतिशत केंद्र, 30 प्रतिशत राज्य सरकार और 20 प्रतिशत प्रदेश का नगरीय निकाय देगा।

अयोध्या पर फैसला

रायबरेली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पास किया गया।इसके साथ यूपी स्टेट सेप्टेज मैनेजमेंट पालिसी मंजूर की गई। प्रदेश में 652 नगर निकायों में 5 करोड़ आबादी है।अपशिष्ट जल प्रबंधन की 3300 एमएलडी क्षमता अभी है और 1280 एमएलडी की क्षमता विकसित की जा रही है। इन निकायों के भीतर 72 लाख ऑन साइट कलेक्शन होता है जिसमे 5560 एमएलडी कलेक्शन आता है। इसके लिये ट्रेनिंग, सुरक्षा आदि व्यवस्था की जाएगी। सफाई कर्मियों की सुरक्षा के सभी कदम उठाए जाएंगे। 2019 तक सभी प्रारंभिक व्यवस्था, 2021 तक सभी निकाय पालिसी से जोड़ेंगे और 2023 तक इसे पूरी तरह लागू हो जाएगी। केंद्र, राज्य, निकाय और सीएसआर से व्यवस्था फण्ड की की जाएगी। 2023 के बाद उपभोक्ता पर सरचार्ज लगाकर सभी खर्च निकाले जाएंगे। इसके जरिये सरकार शहरों में सेप्टेज प्रबंधन करेगी। जिनके घरों में सेप्टिक टैंक बने हैं उन्हें पांच वर्ष में 2500 रुपये या हर साल 500 रुपये का शुल्क देना होगा। बड़े या छोटे शहरों के हिसाब से यह शुल्क कम या ज्यादा हो सकता है। इसके जरिये सरकार प्रदेश में बने करीब 72 लाख सेप्टिक टैंकों का प्रबंधन करेगी। इन्हें अभियान चलाकर 2023 तक साफ कराया जाएगा। इसके बाद हर पांच साल इसकी नियमित सफाई करानी होगी।

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