तन की लड़ाई में जीता मन

तन की लड़ाई में जीता मन

तन की लड़ाई में जीता मन

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 24/10/19 12:31:04pm


लखनऊ। शाहजहांपुर के रहने वाले उमरी का उम्र बढऩे के साथ स्तन पूरा विकसित हो गया। जन्म से पुरुष लिंग, अंडकोष कम विकसित था। साथ ही यूट्रस, योनि, ओवरी भी थी। इस परेशानी को डिजीज ऑफ सेक्सुअल डिफ्रेंसिएशन कहते हैं। इसमें महिला और पुरुष के दोनों अंग बने होते हैं। इसका पता जब किशोरावस्था पर पहुंचता हैं। तब लगता या तो जन्म के समय ही विशेषज्ञ ध्यान दें तो लगता है। जब उमरी 13 साल का हुआ तो उसे लगा कि वह लड़की नहीं है। विकास भी लड़की की तरह हुआ, लेकिन मानसिक रूप से वह अपने को लड़की मानने को तैयार नहीं था, क्योंकि मेल हार्मोन भी प्रभावी हो रहे थे। घर वाले संजय गांधी पीजीआइ के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. अंकुर भटनागर के पास पहुंचे। तमाम परीक्षण के बाद तय किया गया कि यह लड़का ही बन सकता है। अब पहली सर्जरी के बाद महिला वाले अंग निकाल दिए गए। इससे फीमेल हार्मोन का असर खत्म हो रहा है।यूरो सर्जन प्रो. एमएस अंसारी के साथ मिलकर पहले चरण में ओवरी, यूट्रस निकाला। साथ ही योनि को बंद किया 

इसे भी पढ़े:दिल्‍ली हाईकोर्ट से कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार को मिली जमानत

 विकसित स्तन को इनफीरियर पेडिकल रेडिकल रीडक्शन सर्जरी तकनीक से निकाला। इसमें विशेष ध्यान देना होता है जिससे चेस्ट पुरुषों जैसा ही दिखे। फीमेल आर्गन निकल जाने से फीमेल हार्मोन प्रोजेस्ट्रान, एस्ट्रोजन का स्तर भी कम हो जाता है। इसके बाद पहले से बने पुरुष लिंग को विकसित करने के लिए थेरेपी शुरू की गई। प्रो. भटनागर के मुताबिक दवा से यदि पूरा विकसित नहीं हुआ तो उसके लिए भी विशेष सर्जरी की जाएगी। इसके बाद पेशाब का रास्ता जो बना है उसका छिद्र सही जगह पर करने की सर्जरी होगी। उमरी ने अपना नाम भी उमेंद्र कर लिया है। दस  हजार में से दो बच्चों में होती है यह परेशानीआठ हजार बच्चों में से दो में सेक्स की दुविधा की परेशानी होती है। कई में फीमेल आर्गन विकसित होता है और मेल आर्गन कम विकसित होता तो कुछ में उल्टा होता है। जन्म के समय ही परेशानी पता कर कुछ हद तक सर्जरी की जा सकती है, लेकिन हार्मोन थेरेपी युवा अवस्था की दहलीज पर रखने के बाद संभव है, क्योंकि इस समय हार्मोन एक्टिव होते हैं।

Recent Comments

Leave a comment

Top