एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है स्टेच्यु ऑफ यूनिटी

एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है स्टेच्यु ऑफ यूनिटी

एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है स्टेच्यु ऑफ यूनिटी

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 30/10/19 04:16:32pm


दिलीप सिंह क्षत्रिय

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के  एक भारत श्रेष्ठ भारत मिशन  के उपलक्ष् य में मुझे कुछ लिखने कहा गया, जिसमें  एक भारत श्रेष्ठ भारत मिशन  का अर्थ चरितार्थ होता हो । विषय मिलने के बाद मैंने कई विषयों और पुस्तकों को खंगाला, तभी मेरे हाथ सरदार साहब पर राजमोहन गाँधी द्वारा लिखित एक पुस्तक हाथ लगी और दिलो दिमाग में एक बिजली सी दौड़ गई । बात जब  एक भारत श्रेष्ठ भारत  की हो, सरदार साहब के बारे में हो, या उनसे जुड़ी चीजों के बारे में हो, उन पर लिखने से बेहतर और क्या विषय हो सकता है  क्योंकि वही तो एक भारत के प्रणेता थे ।

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क्योंकि सरदार पटेल किसी एक दल के नहीं हैं, उनके जीवन की ऊंचाई भारत के गौरवगान से जुड़ी है। सरदार पटेल न होते तो भारत खंड-खंड हो गया होता । उन्होंने जो काम किया वह अनोखा काम था । जो राजे-रजवाड़े थोड़ी सी बात पर युद्ध कर लेते थे, उन्हें एक सूत्र में बांध दिया । ये राजे रजवाड़े सभी सम्प्रदायों को मानने वाले थे । सरदार पटेल एकता की मूर्ति थे तथा सच्चे अर्थों में सेकुलर नेता थे । उनकी सेकुलरिज्म कभी सोमनाथ मंदिर के निर्माण के नाम पर भी आड़े नहीं आती थी ।  पटेल भारत के चीफ आर्किटेक्ट थे । जब अंग्रेजों ने भारत छोडऩे का फैसला किया, तो पटेल ने 562 रियासतों को एक साथ लाने का महत् वपूर्ण काम किया, जिनकी वजह से देश धर्म और परंपरा के नाम पर बंटा हुआ था । कौटिल्य जैसे दिमाग वाले पटेल को ये पता था कि सभी रियासतों को एक साथ लाना कितना जरूरी है और वह यह भी जानते थे कि इसे कैसे करना है । ये करने में बहुत सारी पॉलिटिकल बार्गेनिंग करने की जरूरत थी और सौभाग्य से उसके लिए हमारे पास सरदार पटेल थे । लेकिन यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि अब तक उन्हें उनके काम के हिसाब से महत्व नहीं मिल सका । न तो राजनीतिक रूप से, ना ही किसी अन्य तरीके से । ऐसे में सरदार जिस गुजरात से थे, उसी गुजरात से नेतृत् व के रूप में उभरे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल को वैश्विक ऊंचाईयां दिलाने की ठानी और उनका सपना गुजरात में स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी के रूप में साकार हुआ । अब उनकी प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो उनके कामों के हिसाब से उनका कद दिखाती है । आज अगर  एक भारत श्रेष्ठ की बात करनी है तो सरदार की ऊँची प्रतिभा को गौरवान्वित करती स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी की ही करनी चाहिए।

कई सारे लोग जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बारे में न जानते हो उन्हें जानना चाहिए कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के प्रथम उप प्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमन्त्री वल्लभ भाई पटेल को समर्पित एक स्मारक है, जो भारतीय राज्य गुजरात में स्थित है । गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के जन्मदिवस के मौके पर इस विशालकाय मूर्ति के निर्माण का शिलान्यास किया था । यह स्मारक गुजरात के भरुच के निकट नर्मदा जिले में स्थित सरदार सरोवर बांध से 3।2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक स्थान पर है । सरदार पटेल की यह प्रतिमा 182 मीटर ऊंची है। जो अमेरिका की  स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी  से तो ऊंची है ही, साथ ही चीन की  स्प्रिंग टेंपल बुद्धा  से भी 177 फुट ऊंची है, यानी कि यह प्रतिमा दुनिया में सबसे ऊंची है, जो एक रिकॉर्ड है । यहीं नहीं सिर्फ प्रतिमा के अनावरण के 11 महिनो में ही 26 लाख से अधिक पर्यटकों ने इस स्थान का भ्रमण कर लिया है, जो की अपने आप में एक रिकॉर्ड है । गुजरात सरकार द्वारा 7 अक्टूबर 2010 को इस परियोजना की घोषणा की गयी थी । इस मूर्ति को बनाने के लिये लोहा, पूरे भारत के गाँव में रहने वाले किसानों से, खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया है । सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने इस कार्य हेतु पूरे भारतवर्ष में 36 कार्यालय खोले, जिससे लगभग 5 लाख किसानों से लोहा जुटाने का लक्ष्य रखा गया । इस अभियान को  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अभियान  नाम दिया गया । 3 माह के इस अभियान में लगभग 6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना हेतु लोहा दान किया । इस दौरान लगभग 5,000 मीट्रिक टन लोहे का संग्रह किया गया। 182 मीटर की ये प्रतिमा 5 सालों में बनकर तैयार हो गई है, जिसने अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। ये दिखाता है कि अगर काम करने की इच्छा से कोई काम किया जाए तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी समय सीमा के तहत हासिल किया जा सकता है। इस मूर्ति को पद्म भूषण से सम्मानित शिल्पकार राम वनजी सुतार ने डिजाइन किया है। राम वनजी के बारे जानना रोचक है, राम वनजी पहले गांव में बढ़ईगिरी का काम करते थे। वे गांव की दीवारों पर चित्र बनाते थे। उस समय गांव वाले जो बर्तन खरीदते उस पर नाम भी लिखवाते थे। एक इंटरव्यू में राम वनजी ने बताया था कि उनके गांव के घरो में बिच्छू बहुत निकलते थे। एक बार उन्होंने एक बिच्छु को मार दिया। फिर उसको देखकर उसकी आकृति साबुन पर बनाई। यह उनकी पहली कृति थी । राम वनजी ने अब तक सबसे ज्यादा मूर्तियां महात्मा गांधी की बनाई हैं। विश्वभर के 350 शहरो में स्थापित गांधी जी की मूर्तियां राम वनजी ने ही बनाई हैं। उन्हें 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। इसे बनाने का काम लार्सेन एंड टर्बो और राज्य सरकार की सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड ने किया है। इसे बनाने में 250 इंजीनियर और 3400 मजदूर लगे थे, जिन्होंने 33 महीनों तक काम कर के मूर्ति का निर्माण किया। इस मूर्ति पर न तो तेज हवाओं का कोई असर होगा, ना ही भूकंप का। इसका बाहरी हिस्सा कांसे के 553 पैनल से बनाया गया है। हर पैनल में 10-15 माइक्रो पैनल हैं।आधार सहित इस मूर्ति की कुल ऊँचाई 240 मीटर है जिसमे 58 मीटर का आधार तथा 182 मीटर की मूर्ति है। यह मूर्ति इस्पात साँचे, प्रबलित कंक्रीट तथा कांस्य लेपन से युक्त है।

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मूर्ति निर्माण के अभियान से  सुराज  प्रार्थना-पत्र बना जिसमे जनता बेहतर शासन पर अपनी राय लिख सकती थी। सुराज प्रार्थना पत्र पर 2 करोड़ लोगों ने अपने हस्ताक्षर किये, जो कि विश्व का सबसे बड़ा प्रार्थना-पत्र बन गया जिसपर हस्ताक्षर हुए हों ।  सरदार श्री की प्रतिमा भारत के इतिहास से भारत के युवाओं को जोड़ेगी तथा उनको राष्ट्रीय जीवन मूल्यों की याद दिलायेगी, गुलामी के साये से बाहर निकालेगी, तथा विश्व में हमारी ताकत को प्रकट करेगी। स्टैच्यू आफ यूनिटी भारत के हर व्यक्ति के स्वाभिमान को जगाने की कोशिश करेगी। जो अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम करेगी। आने वाले समय में जब जब एक भारत श्रेष्ठ भारत की बात निकलेगी तब तब सरदार साहब और  स्टेच्यु ओफ यूनिटी  के स्वप्नद्रष्टा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को याद किया जाएगा।

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