राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आए, उसे सभी खुले मन से स्वीकारें:आरएसएस

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आए, उसे सभी खुले मन से स्वीकारें:आरएसएस

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आए, उसे सभी खुले मन से स्वीकारें:आरएसएस

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 31/10/19 07:31:40pm


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने। सुप्रीम कोर्ट के वाले फैसले को खुले मन से स्वीकर करने की बात कही है. आरएसएस ने कहा कि आगामी दिनों में श्रीराम जन्मभूमि वाद पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है.बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजारआरएसएस ने फैसले को खुले मन से स्वीकर करने की बात कहीराम मंदिर मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले को खुले मन से स्वीकर करने की बात कही है.आरएसएस ने कहा आगामी दिनों में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के वाद पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है. निर्णय जो भी आए उसे सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए. निर्णय के पश्चात देश भर में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे.दरअसल, दिल्ली में आरएसएस की बैठक हो रही है. इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी मौजूद हैं.

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 संगठन के प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक हरिद्वार में प्रचारक वर्ग के साथ दो दिन की बैठक पहले से निश्चित थी. लेकिन इस बैठक को आवश्यक कारणों से स्थगित कर दिया गया. लेकिन बैठक हरिद्वार के स्थान पर अब दिल्ली में हो रही है. उन्होंने कहा कि निर्णय के पश्चात देशभर में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे, हम इसपर भी चर्चा कर रहे हैं.आगामी दिनों में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के वाद पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है।निर्णय जो भी आए उसे सभी ने खुले मन से स्वीकार करना चाहिए।निर्णय के पश्चात देश भर में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे,यह सबका दायित्व है।इस विषय पर भी बैठक में विचार हो रहा है।बता दें कि अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है. उम्मीद की जा रही है कि नवंबर में ही इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला दे सकता है. आरएसएस से पहले हाल ही में पीएम मोदी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए समाज किस तरह से सतर्क रहा है, इसका उदाहरण सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से मिला था.

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40 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने 40 दिन तक लगातार सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं.सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला-के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 17 नवंबर से पहले अयोध्या मामले पर फैसला सुना सकते हैं.

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रविवार को मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि हमारा समाज हमेशा से देश की एकता और सद्भाव के लिए सतर्क रहा है. मुझे याद है कि जब सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राम मंदिर पर अपना फैसला सुनाया तो भांति-भांति के लोग मैदान में आ गए थे. कुछ बयानबाजों और बड़बोलों ने सिर्फ खुद को चमकाने के लिए न जाने कैसी-कैसी बातें की थीं. ये सब पांच-दस दिन तक चलता रहा, लेकिन जैसे ही फैसला आया तो आनंददायक बदलाव देश ने महसूस किया.

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