बगदादी का खेल खत्म

बगदादी का खेल खत्म

बगदादी का खेल खत्म

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 01/11/19 12:47:37pm


अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को औपचारिक रूप से ऐलान किया कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सरगना अबू बकर अल-बगदादी को मार गिराया गया है। बगदादी के मारे जाने के दावे पहले भी किए जा चुके हैं और रूस को अब भी इस पर यकीन नहीं है। लेकिन जब ट्रंप ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेस करके इसकी पुष्टि की है तो अविश्वास का कोई कारण नहीं है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना के स्पेशल कमांडोज ने सीरिया के इदलिब प्रांत के सुदूर गांव बारिशा में शनिवार की रात बगदादी के खिलाफ विशेष ऑपरेशन चलाया। पूरी तरह घिर जाने के बाद बगदादी ने धमाका करके खुद को उड़ा लिया। इस तरह बगदादी भी उसी तरह की कार्रवाई में मारा गया जिस तरह ओसामा बिन लादेन मारा गया था।

जिसका इंतजार था अब वो आ रहा हैं!

बगदादी लादेन से बहुत प्रभावित था और उसी के नक्शेकदम पर चलते हुए उसकी मौत का बदला लेना चाहता था। इस तरह दुनिया को दो खूंखार आतंकियों से मुक्ति मिली जिन्होंने अपने खूनी खेलों से पूरी मानवता को थर्रा दिया था। इस्लामी आतंकवाद का घृणित मुहावरा उनके कारण ही शुरू हुआ। उनके कृत्यों से इस्लाम की उदारवादी छवि कमजोर पड़ी और कई मुल्कों में मुस्लिम समुदाय को संदिग्ध छवि का शिकार होना पड़ा। बगदादी असल में वहाबी विचारधारा से प्रेरित था जिसका उद्देश्य दुनिया में इस्लामी उसूलों पर आधारित मध्यकालीन राज्य की पुनर्स्थापना बताया गया। उसने खुद को खलीफा घोषित किया और सीरिया-इराक के कई इलाकों पर अपना शासन चलाया। बगदादी का मकसद एक मॉडल इस्लामी राज्य कायम करके धीरे-धीरे उसका प्रसार करना था। लेकिन यह उसका सैद्धांतिक पहलू था। व्यवहार में वह पश्चिम एशिया की शिया-सुन्नी राजनीति की पैदाइश था। शियाओं के खिलाफ उसे एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया। उसका संगठन इस्लामिक स्टेट शियाओं के खिलाफ गहरी नफरत से भरा था और उसने सभी गैर-सुन्नियों के खिलाफ खूनी अभियान चलाए। उसकी विचारधारा ने भारत समेत दुनिया के कई चरमपंथियों को प्रभावित किया। उससे असर में कई देशों के नौजवान इस्लामिक स्टेट जॉइन करने पहुंच गए। जो संगठन में शामिल नहीं हुए, वे निजी स्तरों पर ही कार्रवाई करने लगे। अनेक देशों में उन्होंने आतंकी गतिविधियां संचालित कीं।

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अब भी यह कहना मुश्किल है कि बगदादी के मारे जाने से आइसिस की कमर पूरी तरह टूट जाएगी। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि उसके मारे जाने के बाद कोई और उसकी कमान संभाल लेगा और संगठन पहले की ही तरह चलता रहेगा क्योंकि इसका एक मजबूत नेटवर्क दुनिया भर में फैला हुआ है। एक कड़वी सचाई यह है कि कुछ ताकतवर देशों ने अपने हितों के लिए कई बार ऐसे संगठनों को हथियारों और अन्य तरीकों से सहायता दी है। अगर आतंकवाद को समाप्त करना है तो ऐसी सरकारों से भी सख्ती से पेश आना होगा। लादेन और बगदादी का हश्र बताता है कि हिंसा और अराजकता का अंत एक न एक दिन इसी तरह होना है।

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