खौफनाक अध्याय का अंत

खौफनाक अध्याय का अंत

खौफनाक अध्याय का अंत

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 02/11/19 12:20:38pm


भय, आतंक व क्रूरता का प्रतिनिधि चेहरा इस्लामिक स्टेट के सरगना अबू बकर अल बगदादी के खात्मे से दुनिया के सभ्य समाज ने राहत की सांस ली है। कहना कठिन है कि पूरी दुनिया में पांव पसार चुके इस आतंक के सुनियोजित संगठन का खात्मा हो जायेगा। लेकिन इतना तय है कि बगदादी के बाद संगठन का तुरंत पटरी पर लौटना आसान नहीं होगा। नि:संदेह इस तरह के आतंकी संगठनों का जन्म महाशक्तियों के शक्ति प्रदर्शन के खिलाफ या फिर महाशक्तियों के सहयोग से हुआ। इन्हें पहले सत्ता विशेष को उखाडऩे के लिये इस्तेमाल किया गया, बाद में ये इन्हीं देशों के लिये भस्मासुर साबित हुए। एक बगदादी के जाने से उतना फर्क नहीं पड़ेगा, जब तक कि आतंक की उर्वरा जमीन को नेस्तनाबूद न किया जाये। सीरिया और इराक से सल्तनत गंवाने के बावजूद यदि आईएस अपना वजूद बनाये हुए रहा तो इसके संगठन की ताकत का अंदाज सहज लगाया जा सकता है। बहरहाल, इस वहशी आतंकी का खात्मा उन लोगों की आत्मा को जरूर शांत करेगा, जिनके सिर बगदादी के इशारे पर क्रूरता से कलम कर दिये गये थे। उन हजारों यजीदी महिलाओं को सुकून देगा, जिन्हें यौन दासी बनाकर अमानवीय अत्याचार किये गये।

पानी की आस में दर्जनों गांव

 अफ्रीका से लेकर आस्ट्रेलिया तक आतंक का साम्राज्य फैलाने वाले आईएस की संरचना और दुनियाभर के युवाओं को इसमें शामिल होने के लिए आकर्षित करने में बगदादी की बड़ी भूमिका थी। वह उस मध्यकालीन इस्लामिक रीतियों-नीतियों वाले राज्य की स्थापना करने को आतुर था, जिसमें गैर-सुन्नियों के लिए कोई जगह नहीं थी, जिसके लिये उसने भीषण रक्तपात करने से भी गुरेज नहीं किया। ऐसे में बगदादी का खात्मा राहत देने वाला तो है मगर हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा ताकि फिर कोई नया बगदादी पैदा न हो। सीरिया के इदलिब प्रांत के सुदूर गांव बारिशा में अमेरिका के स्पेशल कमांडोज द्वारा की गई कार्रवाई के राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस ढंग से बगदादी के खात्मे की सूचना दी, उसे 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के लिये श्रेय लेने की कोशिश बताया जा रहा है। हालांकि, यह भी हकीकत है कि ओसाम बिन लादेन के खात्मे का श्रेय बराक ओबामा को राष्ट्रपति चुनाव में नहीं मिला था। बहरहाल, मानवता को अपने खूनी खेल से खौफजदा करने वाले बगदादी का खात्मा राहत की खबर है। दरअसल, आईएस की क्रूरता की तस्वीरों ने इस्लाम के प्रति पूरी दुनिया का नजरिया बदला है। आज विकसित देशों में इस धर्म को मानने वालों संदिग्ध छवि का शिकार होना पड़ा। सीरिया और इराक के कुछ इलाकों में क्रूर शासन चलाते हुए बगदादी ने एक इस्लामिक मॉडल को स्थापित करने का प्रयास किया, जिसे पूरी दुनिया में फैलाना ही उसका मुख्य मकसद था। वहीं एक पहलू यह भी कि साम्राज्यवादी ताकतों ने आईएस को प्रशिक्षण, हथियार व पैसा देकर शियाओं के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। जब वह बेकाबू हो गया तो उसी को आतंक का क्रूर चेहरा बताकर उसके खात्मे को अभियान चलाया गया। 

बगदादी का खेल खत्म

इसके बावजूद आईएस के मजबूत संगठन और वैचारिक आकर्षण ने पूरी दुनिया के युवाओं को भ्रमित किया। केवल अफ्रीका व एशिया के देशों से ही नहीं, बल्कि तमाम यूरोपीय व अमेरिका देशों के युवा इस खूनी संगठन में शामिल होने पहुंचे। ऐसे में यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि बगदादी के खात्मे से आईएस खत्म हो जायेगा। संगठन की शूरा काउंसिल नया नेतृत्व विकसित करेगी। इसके लड़ाके दुनिया के विभिन्न संगठनों में शामिल होकर मानवता के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। जैसे कि अलकायदा के लड़ाके अफगानिस्तान और अफ्रीका में आतंक को सींचने में लगे हैं। पूरी दुनिया में ?उसके समर्थक काले झंडों के साथ नजर आते हैं। बहरहाल, बगदादी का अपनी ही मांद में दर्दनाक अंत यह जरूर बताता है कि आतंक का खात्मा भी खौफनाक ही होता है। हमें हर तरह की कट्टरता व नफरत को खत्म करना होगा ताकि दूसरा बगदादी पैदा न हो।

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