30 साल से नारी वेश में रह रहे हैं चिंताहरण चौहान

30 साल से नारी वेश में रह रहे हैं चिंताहरण चौहान

30 साल से नारी वेश में रह रहे हैं चिंताहरण चौहान

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 02/11/19 07:00:02pm


जौनपुर। मौत भले ही शाश्‍वत सत्य है लेकिन इसका खौफ सभी को होता है। तभी तो बदन पर सुहाग की  साड़ी, कान में झुमका, नाक में नथिया और हाथों में कंगन के साथ सोलहों श्रृंगार करके एक शख्‍स तीस वर्ष से अपने जीवन की नाव खे रहा है। इन्‍होंने पूर्व आइपीएस डीके पांडा की तरह राधा बनने का शौक नहीं पाला है बल्कि मजबूरी  है। विडंबना कहें या हकीकत, संयोग कहें या कुछ और कि परिवार के 14 लोगों को खोने वाले इस शख्स ने अब अपना रूप ही बदल लिया है। महिलाओं के लिबास में रहकर जीविकोपार्जन करने वाले इस श्रमिक की पीड़ा सुनकर हर कोई द्रवित हो जाता है।

साड़ी पहनकर काम करना मजबूरी 

 इसे भी पढ़े  इस्लामाबाद: ट्रेन में जले शवों की पहचान के लिए होगा डीएनए परीक्षण

जी हा हम बात कर रहे हैं जलालपुर क्षेत्र के हौज खास गांव निवासी 66 वर्षीय वृद्ध चिंताहरण चौहान उर्फ करिया की। जिसकी  जीवनगाथा  हारर फिल्म जैसी है। माता-पिता ने 14 साल की उम्र में ही उनकी शादी कर दी। विवाह के कुछ दिन बाद जीवन साथी ने साथ छोड़ दिया। इसके बाद जीविकोपार्जन के लिए 21 वर्ष की अवस्था में चिंताहरण ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए कोलकाता के पश्चिम दिनाजपुर चले गए। जहां इन्हें कई भट्टों के मजदूरों के भोजन के सामान की खरीदारी की जिम्मेदारी मिली। वहां एक बंगाली की राशन की दुकान से नियमित सामान खरीदते थे। धीरे-धीरे दुकानदार से घनिष्ठता बढ़ी और दुकानदार ने 25 वर्ष की अवस्था में चिंताहरण से अपनी पुत्री के विवाह का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बिना सोचे समझे बंगाली लड़की से विवाह रचा लिया। यही निर्णय उनके जी का जंजाल बन गया।

परिवार का भी झेला  विरोध             

 इसे भी पढ़े: जम्मू-कश्मीर के दौरे से, विवाद में केन्द्र सरकार

शादी की जानकारी जब चिंताहरण के परिवारवालों को हुई तो लोगों ने इसका विरोध किया। अपनों की नाराजगी से बचने के लिए वह बिना बताए बंगाली पत्नी को छोड़कर घर भाग आए। उधर, बंगाली परिवार को चिंताहरण के घर का कोई पता नहीं था। पति के धोखे को पत्नी बर्दाश्त नहीं कर सकी और व्यथित होकर आत्महत्या कर ली। एक वर्ष बाद गलती का एहसास होने पर चिंताहरण जब पुनः कोलकाता वापस गए तो उनको पता चला कि पत्नी ने उनके वियोग में आत्महत्या कर ली। उसके बाद घर वापस लौट आए। कुछ दिन बाद परिवारवालों ने तीसरी शादी कर दी और यहीं से समस्याओं का सिलसिला शुरू हो गया। शादी के कुछ ही दिन बाद चिंताहरण स्वयं बीमार पड़ गए। घर के सदस्यों के मरने का सिलसिला जारी हो गया। चिंताहरण ने बताया कि पिता राम जियावन, बड़ा भाई छोटाऊ, उसकी पत्नी इंद्रावती तथा उसके दो पुत्र, छोटा भाई बड़ाऊ तथा तीसरी पत्नी से तीन पुत्री व चार पुत्रों की मौत का सिलसिला एक के बाद एक कर चलता रहा।

स्वप्न में आती थी बंगाली पत्नी   

  इसे भी पढ़े : BJP नेता के बयान के इस बयान के बाद भड़की शिवसेना

चिंताहरण कहते हैं कि अक्सर उसके स्वप्न में बंगालन पत्नी आती थी। जो स्वप्न में ही चिंताहरण के धोखे पर खूब रोती थी। अपनों की लगातार हो रही मौत से मैं टूट चुका था। एक दिन स्वप्न में बंगालन पत्नी आई तो मैं इस पत्नी को बख्श देने के लिए गुहार लगाई। इसके बाद उसने स्वप्न में ही कहा कि मुझे सोलहों श्रृंगार के रूप में अपने साथ रखो तब सबको छोड़ दूंगी। उसकी बात मानकर व खौफ से भयभीत होकर आज 30 साल से सोलहों श्रृंगार करके स्त्री के रूप में जी रहा हूं। आप भले ही इसे अंधविश्वास कहें लेकिन चिंताहरण को पूरा विश्वास है कि नारी वेश धारण करने के बाद से वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो गए। घर में मौत का सिलसिला भी बंद हो गया। इस समय मेरे दो पुत्र दिनेश व रमेश हैं। जो मेरे साथ ही मजदूरी करके परिवार का सहयोग करते हैं। आज भी एक छोटे से कमरे में दो पुत्रों के साथ मौत के खौफ में जीवनयापन कर रहे हैं।

Recent Comments

Leave a comment

Top