अपनी बदहाली पर आंशू बहा रही, आगरा की बाबरी मस्जिद

 अपनी बदहाली पर आंशू  बहा रही, आगरा की बाबरी मस्जिद

अपनी बदहाली पर आंशू बहा रही, आगरा की बाबरी मस्जिद

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 03/11/19 02:28:53pm


आगरा। अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद के अस्तित्व और इतिहास पर सवाल उठाकर दुनियाभर में हंगामा होता रहा और आगरा की बाबरी मस्जिद अपनी बदहाली पर आंसू बहाती रही। यह  आज भी जारी है। इस मस्जिद को बाबर ने 1528 में बनवाया था। खास बात ये है कि 26 दिसंबर, 1530 को आगरा में बाबर की मृत्यु के बाद उसके जनाजे की नमाज भी इसी मस्जिद में पढ़ी गई थी। मस्जिद के सामने ही चारबाग में छह माह तक बाबर का शव रखा रहा, जिसे बाद में काबुल ले जाकर दफनाया गया।                                                                         

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बाबर पहली बार 10 मई, 1526 को आगरा आया था। इससे पहले उसके छोटे बेटे हुमायूं ने आगरा किले को कब्जे में ले लिया और उसका खजाना लूट लिया था। हुमायूं ने सुरक्षा की दृष्टि से यमुनापार पूर्वी क्षेत्र में डेरा डाला था। आज यह इलाका एत्माद्दौला कहलाता है।  बाबर ने आरामबाग (रामबाग) और चार बाग का निर्माण कराया। चारबाग के सामने ही उसने 1528 में बाबरी मस्जिद तामीर कराई थी, जिसमें आज भी विधिवत पांचों पहर की नमाज पढ़ी जाती है।

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बाबर के समय चारबाग पॉश इलाका था, लेकिन अब यह मलिन बस्ती में तब्दील हो गया है। यहां ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद और चारबाग के आसपास की जमीनों पर माफिया ने कब्जा कर लिया है। अवैध बस्तियां भी बस गई हैं। चारबाग जहां बाबर का छह माह तक शव रखा रहा था, वह स्थान भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में है, लेकिन यह भी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है। बाबरी मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद हारून के अनुसार मस्जिद में नमाज तो पांचों वक्त की पढ़ी जाती है, लेकिन जुमे की नमाज के दिन ही ज्यादा नमाजी आते हैं। उस दिन यहां नमाजियों की संख्या 600 पार कर जाती है। मोहम्मद हारून के अनुसार उनकी तीसरी पीढ़ी बाबरी मस्जिद में सेवा कर रही है। यहां नई पीढ़ी को तालीम भी दी जा रही है। यह आगरा की सबसे पुरानी मस्जिद है। इससे पहले आगरा में इस्लाम के अनुयायी नहीं थे और न ही कहीं कोई मस्जिद थी। सबसे पहले बाबर ने ही मस्जिद का निर्माण कराया था, 


 

 

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