नयी सुबह की चुनौती

नयी सुबह की चुनौती

नयी सुबह की चुनौती

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 04/11/19 01:49:34pm


आखिरकार जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370 के प्रावधानों की समाप्ति के बाद अब यह विधिवत रूप से दो केंद्रशासित प्रदेशों में बंट गया है। निश्चय ही यह राज्य के ?इतिहास में बदलावकारी घटना है। हालांकि, यह भी हकीकत है कि कश्मीरी जनमानस अभी इस बदलाव को सहजता से स्वीकार करने को तैयार नजर नहीं आता, जिसमें दशकों से सीमापार से चलाये जा रहे भारत विरोधी अभियान की बड़ी भूमिका रही है, जिसकी परिणति अन्य राज्यों से आये श्रमिकों और ट्रक चालकों की हत्या के रूप में सामने आयी है। यह एक हकीकत है कि बदलाव देश की संसद द्वारा पारित कानून के तहत अस्तित्व में आया है, जिससे पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं उठता। आज जरूरत इस बात की है कि कश्मीरी लोग देश की मुख्यधारा से जुड़कर एक बार कश्मीर को फिर से?धरती का स्वर्ग बनाने में योगदान दें। टकराव व हिंसा से किसी को फायदा नहीं होगा। 

बगदादी का खेल खत्म

फायदा होगा तो कश्मीर के मुद्दे पर पूरी दुनिया में कुप्रचार कर रहे पाकिस्तान को। यही वजह है कि भारत ने अनुच्छेद 370 को हटाये जाने को भारत का आंतरिक मामला बताकर दुनिया में पाक के मंसूबे पर पानी फेर दिया। चंद पाकपरस्त राष्ट्रों को छोड़कर दुनिया की तमाम महाशक्तियां भारत के पक्ष से सहमत नजर आईं। यहां तक कि बड़े इस्लामिक देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मामला बताया। मगर यहां केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना होगा कि महज सुरक्षा बलों के बूते लंबे समय तक स्थितियों को नियंत्रित नहीं रखा जा सकता। हाल में हुई कई आतंकी घटनाओं को इसकी परिणति के रूप में देखा जा सकता है। अन्य राज्यों से आये श्रमिकों व सेब की सप्लाई से जुड़े ट्रक ड्राइवरों पर लगातार बढ़ रहे हमले इसी कड़ी का हिस्सा हैं। नि:संदेह विकास की बाट जोह रहे लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को छोटी प्रशासनिक इकाई का लाभ मिलेगा। दोनों केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह नयी शुरुआत है। ऐसे में केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य बनाने की दिशा में रचनात्मक पहल करनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने फोन सेवा की बहाली और स्कूलों को खोलकर स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश की है, मगर अभी बहुत कुछ करना बाकी है। यह ठीक है कि पाकिस्तान द्वारा पूरी दुनिया में अनुच्छेद-370 को समाप्त करने के खिलाफ किये जा रहे कुप्रचार के मुकाबले के लिये यूरोपीय यूनियन के सांसदों का कश्मीर दौरा एक सार्थक पहल है, मगर साथ ही यह भी जरूरी है कि भारतीय विपक्षी राजनेताओं को भी इसी तरह कश्मीर जाने का मौका मिले। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने से परहेज करे। राष्ट्रीय सरोकारों की कीमत पर राजनीति की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद सरकार को विपक्ष के साथ?मिलकर कश्मीरी जनमानस को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में रचनात्मक पहल करनी ही चाहिए। यह भी संयोग है कि ये दोनों केंद्रशासित प्रदेश उस दिन देश का हिस्सा बने, जिस दिन आजादी के बाद देश?के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सरदार पटेल की जयंती है। बहरहाल, सरकार की प्राथमिकता जनजीवन सामान्य बनाने की होनी चाहिए। 

 

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यह भी हकीकत है कि लंबे समय तक कश्मीर को सुरक्षा बलों के भरोसे सामान्य नहीं बनाये रखा जा सकता। वह भी तब जब पाकिस्तान लगातार कश्मीर की शांति भंग करने की कोशिश में लगा है। साथ ही पाकपरस्त ताकतें सुरक्षा बलों व बाहरी राज्यों के लोगों पर निशाना साधने लगी हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्दी ही कश्मीर में हालात सामान्य होंगे और साथ ही कश्मीरी जनमानस विकास को प्राथमिकता मानकर देश की मुख्यधारा में शामिल होगा।

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