जीवन के दिलचस्प मोड़ों की कहानी

जीवन के दिलचस्प मोड़ों की कहानी

जीवन के दिलचस्प मोड़ों की कहानी

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 06/11/19 03:43:41pm


सुशील हसरत नरेलवी

समीक्ष्य उपन्यास मुट्ठी भर यादें साहित्य अकादमी पुरस्कार से अलंकृत, पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित 'रस्किन बॉन्ड द्वारा रचित 'ए हैंडफुल ऑफ नट्स का हिन्दी रूपान्तर है, जिसे लेखक ने साठ वर्ष की आयु में लिखा। इस उपन्यास का कथानक लेखक की उस समय की यादों को टटोलता है जब वह इक्कीस वर्ष का बांका नटखट नौजवान, था। लेखकीय संघर्ष के बीच रोमांचपूर्ण आर्थिक अभाव इसे दिलचस्प बनाता है। उपन्यास के अधिकतर पात्र और उनसे जुड़ी घटनाएं असली जान पड़ती हैं। कहीं-कहीं कल्पना का सहारा लेकर कथ्य को रोचकता प्रदान करने का प्रयास हुआ।

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कथानक सन् 1955 के ख़ूबसूरत देहरादून एवं इसके आजू-बाजू अठखेलियां करता हुआ कुछेक ख़ास रंग में रंगी यादों की दिलचस्प कहानी बयान करता है। इसके पात्रों, मगदौर की दौलतमन्द महारानी व उसकी बेटी इन्दू, जिसकी मुहब्बत में लेखक पागल था, लेखक जय शंकर, हमराज़ दोस्त सीताराम, वक़ील सुरेश माथुर, विलियम मेथसन, रेस्तरा इण्डियाना में गायक लैरी गोम्स, दिलाराम, मकान-मालकिन, फि़ल्मी सितारे, नरगिस दलाल, टॉम अल्टर, स्वामी अय्यर एवं अपराधियों के लिए क्रूर चौकी इंचार्ज शेर सिंह, का सहज, सटीक परन्तु दिलचस्प चरित्र-चित्रण माहौल को रोमांटिक, रोचक व उत्सुकता से भरपूर रखने में कामयाब रहा है।

'मुट्ठी भर यादें की बात करें तो इसमें इक्कीस वर्षीय युवक लेखक बनना चाहता है परन्तु बार-बार अपने लक्ष्य से भटक जाता है। कहीं इन्दू के मोहपाश में तो कहीं उसकी मां मगदौर की महारानी की बांहों में फंसकर तो कहीं सर्कस से भागे बाघ से सिहरन भरी मुलाक़ात रौंगटे खड़े करती है। इक्कीस साल के नौजवान को कुदरत, बीयर, व्हिस्की व फूलों से लगाव तो 'जिऱेनियम से प्यार है।

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अन्त में सभी पात्र जि़न्दगी के उतार-चढ़ाव से गुजऱते हुए अपने-अपने मुक़ाम को हासिल करने में सफल हो जाते हैं, मगर कुछेक टीस दिल में लिए। कुल मिलाकर उपन्यासकार रस्किन बॉन्ड का आत्मकथात्मक समीक्ष्य उपन्यास 'मुट्ठी  भर यादें का कथानक रोमांचक, रोचक व लेखक के अपनी निजी जि़न्दगी के अनुभवों एवं नौजवानी के कुछेक रंगीन कि़स्सों के साथ उस समय की महत्वपूर्ण किन्तु रोमांचक जानकारी से भी पाठक को अवगत कराता है। उपन्यासकार की लेखकीय कला-कुशलता व परिपक्व अभिव्यक्ति उपन्यास के कथ्य में झलकती है। सधे हुए शिल्प के साथ बिम्ब व संवाद गूढ़ अर्थ लिये सीधे दिल में उतरते हैं।

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