सुधांशु द्विवेदी व पीके गुप्ता को 3 दिन की रिमांड पर, eow आरोपितों का कराएगी आमना-सामना

 सुधांशु द्विवेदी व पीके गुप्ता को 3 दिन की रिमांड पर, eow आरोपितों का कराएगी आमना-सामना

सुधांशु द्विवेदी व पीके गुप्ता को 3 दिन की रिमांड पर, eow आरोपितों का कराएगी आमना-सामना

Posted by: Mr. Diwakar Pathak, Updated: 06/11/19 06:28:48pm


लखनऊ। बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के भविष्य निधि घोटाले में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी, सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता और पूर्व एमडी एपी मिश्र की गिरफ्तारी के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा ने जांच की गति तेज कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बुधवार को सुधांशु द्विवेदी और पीके गुप्ता को 7 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को 3 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है।घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू को सिविल जज जूनियर डिविजन ने बुधवार शाम 4 बजे से 9 नवंबर तक की कस्टडी रिमांड दी है।अब कस्टडी रिमांड पर लेकर ईओडब्ल्यू दोनों से पूछताछ शुरू करेगी। इसके साथ ही हजरतगंज पुलिस ने पूर्व एमडी एपी मिश्रा को भी कोर्ट में पेश किया। ईओडब्ल्यू घोटाले की तह तक जाने के लिए पूर्व एमडी एपी मिश्रा से दोनों अन्य आरोपितों का सामना कराने की भी तैयारी की जा रही है।

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पावर कारपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र की गिरफ्तारी के बाद डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह ने कहा कि पीएनबी हाउसिंग में भी भविष्य निधि की रकम नियम विरुद्ध निवेश की गई थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व एमडी एपी मिश्र के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। मिश्र पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह के करीबी रहे हैं। सपा शासन के दौरान नियमों में बदलाव कर एपी मिश्र को प्रबंध निदेशक के पद पर सेवा विस्तार दिया जाता रहा। ट्रस्ट के चेयरमैन होने के नाते पावर कारपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष संजय अग्रवाल (वर्तमान में केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय के सचिव) समेत कई और बड़ों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

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सरकार घोटालों और भ्रष्टाचार में छोटे अफसरों पर तो कार्रवाई कर रही है, लेकिन आइएएस अफसरों पर हाथ डालने से बच रही है। सीबीआइ की छापेमारी में आइएएस अफसर अभय, विवेक, डीएस उपाध्याय समेत कई अफसरों के घर से पैसे बरामद हुए, जबकि पीएफ घोटाले में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आइइएस संजय अग्रवाल का नाम आ रहा है, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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बिजली विभाग में जिन अधिकारियों पर इंजीनियरों व कर्मचारियों के सामान्य व अंशदायी भविष्य निधि की रकम को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने इस निधि के 4122.70 करोड़ रुपये को असुरक्षित निजी कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफसीएल) में नियमों का उल्लंघन करके लगा दिया। मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक यूपी स्टेट सेक्टर पावर इंप्लाइज ट्रस्ट और यूपीपीसीएल सीपीएफ (कंट्रीब्यूटरी प्रॉविडेंट फंड) ट्रस्ट की निधि के कुल 4122.70 करोड़ रुपये डीएचएफसीएल में फिक्स्ड डिपॉजिट करा दिए गए।

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मुंबई हाईकोर्ट द्वारा डीएचएफसीएल के भुगतान करने पर रोक लगाने के बाद बिजली कर्मियों के भविष्य निधि का 2267.90 करोड़ रुपये (मूलधन) फंस गया है। इसमें जीपीएफ का 1445.70 करोड़ व सीपीएफ का 822.20 करोड़ रुपये है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) डीएचएफसीएल मामले की जांच पहले से कर रहा है। अब राज्य सरकार ने पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने का फैसला लिया है। पुलिस पहले ही तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी, महाप्रबंधक व सचिव ट्रस्ट प्रवीण कुमार गुप्ता और पूर्व एमडी एपी मिश्रा को गिरफ्तार कर चुकी है।आरोपितों का कराया जायेगा  आमना-सामना से 

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