कूड़े के ढेर में आम आदमी की पहचान

कूड़े के ढेर में आम आदमी की पहचान

कूड़े के ढेर में आम आदमी की पहचान

Posted by: Firsteye Desk, Updated: 06/11/19 06:37:06pm


रिपोर्ट- सुरेन्द्र कुमार मिश्र 


औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना के तहत जारी किए जाने वाले आधार कार्ड किस हद तक भारतीय डाक विभाग की मनमानी और भ्रष्टाचारी की भेंट चढ़ रहे हैं। आज जिले के बिधूना थाना क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस रुरुगंज केसमीपवर्ती गांव कुसमरा के पास करीब 2 बोरी आधार कार्ड पड़े मिले जिन्हें देखकर ग्रामीणों ने वहां पहुंचने के बाद उसमें से कुछ लोगों ने अपने आधार कार्ड छांटे और उसके बाद जिला प्रशासन से लेकर अन्य अधिकारियों को सूचना दी गई। 

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बताया जाता है कि सूचना मिलने के बाद भी कोई आला अधिकारी तो मौके पर नहीं पहुंचा लेकिन कुछ अधिकारियों ने अपने उसी चिर परिचित अंदाज में यह जरूर कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और इसकी जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी। लेकिन सवाल उठता है कि केंद्र सरकार की सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण योजना के तहत जारी होने वाले आधार कार्ड जब इस तरह से बोरियों में भरकर खेतों में फेंके जा रहे हैं तो जिम्मेदारी कौन तय करेगा और कब जिम्मेदारी तय होगी क्योंकि जब जिम्मेदारी ही तय नहीं हो पा रही है तो कार्यवाही क्या होगी । मोदी सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की हवा निकालने के लिए लगता है कि  प्रशासन भी संकल्पित है ,अन्यथा इस पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए थी और जो जिम्मेदार थे उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज  कराकर उनके खिलाफ प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए थी। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मोदी सरकार चाहे जितने दावे करें कि वह पारदर्शिता लाकर भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहती है लेकिन उनके अधीनस्थ विभागों के कर्मचारी किस हद तक मनमानी करके जनता के साथ मजाक कर रहे हैं ।

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जब आधार कार्ड जैसी योजना को पलीता लगाने में कर्मचारियों को कोई संकोच नहीं है तो मोदी सरकार को यह सोचना ही होगा कि अन्य योजनाओं का यह कर्मचारी किस तरह से मजाक उड़ाते होंगे। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में एक साथ दो बोरी आधार कार्ड खेतों में मिलना निर्वाचन प्रक्रिया में एक बाधा उत्पन्न करने के साथ सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती है जिसे स्वीकार करना ही होगा ,और अगर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती है तो यह माना जाएगा कि मोदी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति की हवा निकालने के लिए नौकरशाही ने भी कमर कस ली है। जिलाधिकारी औरैया अभिषेक सिंह मीणा ने इस पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए तहसीलदार बिधूना को जांच सौंपी है।

 

 

 

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