लखनऊ। विश्व धरोहर दिवस 2026 के अवसर पर शनिवार को राज्य संग्रहालय, लखनऊ में ‘हमारी धरोहरें, हमारा गौरव’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा, अपर मुख्य सचिव संस्कृति विभाग अमृत अभिजात के मार्गदर्शन तथा निदेशक डॉ सृष्टि धवन के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर संग्रहालय परिसर में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों को दर्शाती एक आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में देश के प्रमुख विश्व धरोहर स्थलों के छायाचित्र प्रदर्शित किए गए, जिसने दर्शकों और कला प्रेमियों को खासा आकर्षित किया।

धरोहर संरक्षण का संदेश
विश्व धरोहर दिवस प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1982 में International Council on Monuments and Sites द्वारा की गई थी, जिसे 1983 में UNESCO ने वैश्विक मान्यता प्रदान की। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रदर्शनी में दिखी ऐतिहासिक विरासत
प्रदर्शनी में अजंता की गुफाएं, एलोरा की गुफाएं, ताजमहल, आगरा किला और चराईदेव मैदाम्स जैसे प्रमुख धरोहर स्थलों की झलक प्रस्तुत की गई।

प्रतियोगिताओं में छात्रों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम के तहत चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 267 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। चित्रकला प्रतियोगिता में प्रियांश वर्मा ने प्रथम, अक्षत मिश्रा ने द्वितीय और राशी शुक्ला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं सांत्वना पुरस्कार अथर्व शंकर, काजल यादव, एंजल वर्मा, देवश्री सेन और मरियम शोएब को दिए गए।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आराध्या सिंह प्रथम, श्रियांश अस्थाना द्वितीय और ओजस तिवारी तृतीय स्थान पर रहे। सांत्वना पुरस्कार आलेख वर्मा, साक्षी सोनकर, यजत उपाध्याय, छविमणि त्रिपाठी और शशांक यादव को प्रदान किए गए।

मुख्य अतिथि ने किया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्राणि उद्यान, लखनऊ के निदेशक डॉ संजय कुमार विस्वाल उपस्थित रहे। उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं और युवा पीढ़ी का इनसे जुड़ाव बेहद आवश्यक है।
संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी
इस अवसर पर संग्रहालय के निदेशक डॉ विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सकें।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ मीनाक्षी खेमका द्वारा किया गया। अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
