केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की मांग उठने लगी है. कुपवाड़ा से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) विधायक फैयाज अहमद मीर ने शराबबंदी की मांग को लेकर निजी विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) लाने का फैसला लिया है.
इसके साथ ही सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायक अहसान परदेसी ने जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम बहुल इलाकों में शराबबंदी की मांग वाला निजी विधेयक पेश करने का ऐलान किया है.
दोनों विधेयकों को 3 मार्च से शुरू होने वाले जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेश किए जाने की संभावना है. फैयाज मीर और अहसान परदेसी ने विधानसभा सचिवालय को विधेयक भेजे हैं.
पिछले साल अक्टूबर में सत्ता संभालने के बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार का यह पहला बजट होगा.पीडीपी नेता ने जम्मू-कश्मीर में मादक पेय पदार्थों के विज्ञापन, बिक्री, खरीद, उपभोग और निर्माण पर रोक लगाने के लिए निजी सदस्य विधेयक को आगे बढ़ाया है.
मीर ने कहा, “मादक पेय पदार्थों का उपयोग बढ़ रहा है. अगर इस समय शराब के उपयोग की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समाज के लिए विनाशकारी साबित होगा. इसे रोकने के लिए सख्त कानून की जरूरत है.”
वहीं उमर अब्दुल्ला की पार्टी के विधायक अहसान परदेसी ने कहा कि उनके विधेयक का उद्देश्य क्षेत्र के सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को संरक्षित करना है. उन्होंने कहा कि शराब का सेवन कश्मीर की गहरी सूफी परंपराओं के विपरीत है.
उन्होंने कहा, “शराब की अनियंत्रित बिक्री हमारे धार्मिक और सामाजिक मूल्यों का अनादर करती है. हमारी विरासत हमेशा से नशीले पदार्थों के खिलाफ रही है और यह विधेयक उन मूल्यों को बनाए रखने की दिशा में एक कदम है. शराब अपराध, नैतिक पतन और नशे की लत को बढ़ावा देती है.
उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब हम नशीली दवाओं के संकट से जूझ रहे हैं. शराब की आसान उपलब्धता स्थिति को और खराब कर देगी.” दोनों विधेयक शराब पीने और बेचने वालों के खिलाफ कारावास और जुर्माना सहित सख्त दंड की मांग करते हैं.
