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यूजीसी के नए नियमों पर बीजेपी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने खोला मोर्चा, साधा केंद्र और आयोग पर निशाना

नई दिल्ली।यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब इस विरोध में गोरखपुर के बीजेपी विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने यूजीसी और सरकार को पत्र लिखकर नए नियमों पर संज्ञान लेने की मांग की है और इसे हिटलरशाही से भी बड़ी कार्रवाई बताते हुए सवर्ण समाज के खिलाफ अन्यायपूर्ण करार दिया है।

देवेंद्र प्रताप सिंह का आरोप: “यूजीसी ने सवर्णों को आरोपी मान लिया”

बीजेपी MLC ने दावा किया कि यूजीसी ने 2025 में एक गजट प्रकाशित किया था, जिसके तहत गलत शिकायत करने पर जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की प्रावधान था। वहीं, 2026 के गजट में इस दंड व्यवस्था को हटा दिया गया और एससी/एसटी के साथ ओबीसी को भी शामिल किया गया।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा,”इससे यह मान लेना कि सामान्य वर्ग का विद्यार्थी शोषक और उत्पीड़क है, पूरी तरह गलत अवधारणा है। हमें बिना सुने और पक्ष जाने आरोपी मान लिया गया है। यह गैर कानूनी है।”उन्होंने यूजीसी पर आरोप लगाया कि नए नियमों में समान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की गई है।

न्याय मिलना संभव नहीं—MLC का चेतावनी

देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नए नियमों के तहत यदि दलित छात्र शिकायत करता है, तो कोई प्रमाण देने की जरूरत नहीं है, और विभागाध्यक्ष केवल नोटिस देकर छात्र को हॉस्टल, परीक्षा और विश्वविद्यालय से बाहर कर सकता है।“यही माइंडसेट नियम बनाने और सुनवाई करने वाले दोनों में है। ऐसे में सामान्य वर्ग के छात्रों को न्याय मिलना संभव नहीं है।”

राजनीतिक टकराव बढ़ा

गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर पहले से ही सवर्ण समाज और कई बीजेपी नेताओं ने विरोध दर्ज कराया है। देवेंद्र प्रताप सिंह के इस बयान के बाद विवाद और बढ़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार और यूजीसी ने सवर्ण समाज के आशंकाओं पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी संघर्ष दोनों तेज हो सकते हैं।

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