उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चर्चित स्क्रैप माफिया रवि नागर उर्फ रवि काना को जेल से रिहा कर दिया गया, जबकि न तो कोई कोर्ट का आदेश था और न ही वह बरी हुआ था। इस घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।नोएडा कोर्ट ने बांदा जेल सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
क्या हुआ मामला?
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रवि काना 2024 के गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार था।
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उसे गौतमबुद्ध नगर से बांदा जेल ट्रांसफर किया गया था।
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गुरुवार को उसे वीडियो लिंक के जरिए कोर्ट में पेश किया गया और शाम को रिहा कर दिया गया।
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जेल प्रशासन का कहना है कि पुलिस गार्ड उपलब्ध न होने के कारण वीडियो लिंक के जरिए पेश किया गया।
जेल का तर्क
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जेलर के अनुसार, विचाराधीन कैदी के सभी कस्टडी वारंट के आदेश मिल चुके थे।
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29 जनवरी तक वह केवल B वारंट के तहत हिरासत में था।
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अगली सुनवाई की तारीख और संबंधित वारंट की जानकारी न मिलने के कारण उसे रिहा किया गया।
कोर्ट ने खारिज किया तर्क
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नोएडा की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सीजेएम संजीव कुमार त्रिपाठी ने जेलर के तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने पूछा कि जब आरोपी B वारंट पर तलब था और उसी दिन रिमांड पर सुनवाई चल रही थी, तो उसे किस आधार पर रिहा किया गया।
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अदालत ने चेतावनी दी कि इस कृत्य को कैदी के कस्टडी से भागने के समान मानते हुए जेल अधीक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
पुलिस ने रवि काना की तलाश शुरू कर दी
रिहाई के बाद पुलिस पूरी ताकत के साथ रवि काना की तलाश में जुट गई है। जेल प्रशासन और कोर्ट के बीच बढ़ते विवाद के बीच यह मामला अब पूरे राज्य में सुर्खियों में है।
