अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ में बड़ी कटौती के ऐलान के बाद भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली है। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1.2% मजबूत होकर 90.40 के स्तर पर पहुंच गया। यह स्तर तीन साल से अधिक समय में रुपये का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बनी ट्रेड डील पर सहमति के चलते बाजार की एक बड़ी अनिश्चितता खत्म हुई है, जिसका सीधा फायदा भारतीय करेंसी को मिला।
50% से घटकर 18% हुआ टैरिफ, एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत
ट्रंप ने घोषणा की कि भारतीय उत्पादों पर लगाया गया टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से ऊंचे टैरिफ के कारण जो दबाव रुपये पर बना हुआ था, वह अब काफी हद तक खत्म हो गया है।
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, शिन्हान बैंक इंडिया के ट्रेजरी हेड कुणाल सोधानी ने कहा कि ट्रेड डील से पूंजी प्रवाह पर बना बड़ा दबाव हट गया है। विदेशी निवेशकों द्वारा जोखिम का दोबारा आकलन करने से रुपये में सेंटीमेंट आधारित मांग मजबूत हुई है।
2025 में अब तक कमजोर रहा रुपया, लेकिन तस्वीर बदली
गौरतलब है कि 2025 में अब तक रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी में शामिल रहा है। साल की शुरुआत से अब तक इसमें करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि केवल जनवरी महीने में ही रुपया 2% से ज्यादा टूट गया था। सीमित विदेशी निवेश और आयातकों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग ने रुपये पर दबाव बनाया हुआ था।
हालांकि, ताजा ट्रेड डील के बाद हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
शेयर बाजार में भी ऐतिहासिक उछाल, निवेशकों की चांदी
रुपये की मजबूती के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मंगलवार को सेंसेक्स करीब 3600 अंकों की छलांग लगाकर 85,000 के स्तर के पार पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई।
बजट के दिन बाजार में दबाव जरूर देखने को मिला था, लेकिन सोमवार से शुरू हुई रैली ने आज रिकॉर्ड बना दिया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 23 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
