लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि SIR के जरिए जानबूझकर लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
“लोकतंत्र खतरे में, अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद”
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अब सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था की भूमिका निभाने में विफल हो रहा है।
फार्म-7 को बताया साजिश का हथियार
सपा प्रमुख ने दावा किया कि फार्म-7 का दुरुपयोग कर चुनिंदा वर्गों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि:
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फार्म-7 के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई जाए
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अब तक जमा सभी फार्म-7 को रद्द किया जाए
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BLO पर दबाव डालने वालों के खिलाफ FIR दर्ज हो
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दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित किया जाए
BLO के आरोपों से सुलगी आग
इस विवाद को और हवा तब मिली जब एक BLO अश्वनी कुमार का वीडियो सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े लोग उन पर एक समुदाय विशेष के वोट काटने का दबाव बना रहे थे। विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौज का भी आरोप लगाया गया।
हालांकि पुलिस ने इस मामले में अलग पक्ष रखते हुए कहा है कि यह विवाद फॉर्म जमा करने को लेकर गलतफहमी का नतीजा था।
“वोट काटने के पीछे देश विरोधी ताकतें”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मताधिकार छीनने की इस कथित साजिश के पीछे देश विरोधी ताकतें सक्रिय हैं। उन्होंने इसकी न्यायिक जांच की मांग की और पत्रकारों व ईमानदार अधिकारियों से सच सामने लाने की अपील की।
साथ ही उन्होंने PDA समर्थकों से हर वैध वोट को बचाने के लिए सतर्क रहने को कहा।
यूपी की राजनीति में बढ़ी गर्मी
SIR को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों से उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। जहां सपा इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं प्रशासन और सत्तापक्ष आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है।
