चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने चुनाव के दौरान महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को अवैध बताते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।
याचिका में पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और आचार संहिता लागू होने के दौरान भुगतान करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। याचिका में संविधान की धारा 14, 21, 112, 202 और 324 का हवाला देते हुए यह मांग की गई है कि चुनाव आयोग को 25 से 35 लाख महिला वोटर्स को सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर करने के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएँ।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने यह भी चुनौती दी है कि सेल्फ-हेल्प ग्रुप जीविका की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को मतदान के दौरान पोलिंग बूथ पर तैनात करना अनुचित और अवैध था।
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी निर्देश देने की मांग की है कि चुनाव के दौरान कथित भ्रष्ट आचरणों के मद्देनजर बिहार में पुनः विधानसभा चुनाव कराया जाए। याचिका में 2013 के सुप्रीम कोर्ट के मामले एस सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य का हवाला देते हुए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और मुफ्त योजनाओं पर व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगी।
