नई दिल्ली:क्रांतिकारी किसान यूनियन (केकेयू) की राष्ट्रीय कमेटी की विस्तारित ऑनलाइन बैठक में अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे पर गहरी चिंता जताई गई। बैठक में इसे संघ-भाजपा सरकार की किसान-मजदूर विरोधी आर्थिक नीतियों की निरंतरता करार दिया गया, जो देश की कृषि, श्रम और सार्वजनिक ढांचे को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
डॉ. दर्शन पाल बोले– अंतरराष्ट्रीय दबाव में हो रहे फैसले
बैठक की अध्यक्षता करते हुए केकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा समेत देश के अधिकांश किसान संगठन इस प्रस्तावित समझौते से आक्रोशित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार करोड़ों किसानों, खेत मजदूरों और छोटे उत्पादकों के हितों की अनदेखी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव में नीतिगत समझौते कर रही है।
डॉ. पाल ने कहा कि ऐसे व्यापार समझौते देश की खाद्य सुरक्षा, बीज संप्रभुता और कृषि बाजारों को कमजोर कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं।
पहले से संकट में किसान, नई नीतियों से बढ़ेगा दबाव
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसान पहले ही बढ़ती लागत, फसल के गिरते दाम, कर्ज और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में—
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संशोधित बिजली विधेयक के जरिए बिजली क्षेत्र का निजीकरण
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बीज विधेयक के माध्यम से बीजों पर कॉरपोरेट नियंत्रण
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वीबी-जीरामजी बिल
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और कृषि विपणन की राष्ट्रीय नीति
जैसे कदम किसानों की आत्मनिर्भरता खत्म कर उन्हें कंपनियों पर निर्भर बनाने की दिशा में ले जा रहे हैं।
खेती की लागत बढ़ने और कॉरपोरेट एकाधिकार की चेतावनी
केकेयू ने चेतावनी दी कि इन नीतियों के लागू होने से खेती की लागत बढ़ेगी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली कमजोर होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इससे छोटे और सीमांत किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे और कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट एकाधिकार और तेज होगा।
देशभर में जनजागरण और आंदोलन का ऐलान
बैठक में निर्णय लिया गया कि पंजाब सहित सभी राज्यों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव सभाएं, पदयात्राएं और विरोध कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को इस समझौते के संभावित दुष्परिणामों से अवगत कराया जाएगा।
केकेयू ने इस समझौते को किसानों पर “आर्थिक-साम्राज्यवादी हमला” बताते हुए मोदी-ट्रंप के पुतले दहन के कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की।
वाणिज्य मंत्री से इस्तीफे की मांग
यूनियन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि देश के किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
12 फरवरी की आम हड़ताल को समर्थन
केकेयू ने घोषणा की कि वह चारों लेबर कोड, संशोधित बिजली विधेयक, बीज विधेयक और जनविरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की अपील पर होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल का पूर्ण समर्थन करेगी। यूनियन के कार्यकर्ता किसानों, खेत मजदूरों और श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेंगे।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बैठक में साफ किया गया कि यदि सरकार ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए या संसद में किसान-मजदूर विरोधी विधेयक पारित कराने की कोशिश की, तो देशभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
बैठक में इन राज्यों के प्रतिनिधि रहे शामिल
बैठक में विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें—
पंजाब से गुरमीत सिंह महिमा, अवतार सिंह;
हरियाणा से सतीश आजाद;
दिल्ली से अर्जुन प्रसाद;
उत्तर प्रदेश से शशिकांत (अलीगढ़), रामनयन यादव, नगेन्द्र चौधरी, गरीब राजभर, तेज नारायण सिंह, सुरेशचंद्र गांधी;
बिहार से मनोज कुमार, संजय श्याम;
झारखंड से अशोक पाल;
छत्तीसगढ़ से रमाकांत बंजारे, भोला सिंह, अंजोर जोशी;
राजस्थान से बजरंग लाल, पोकर सिंह, रामबिलास और करणीराम सहित कई अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
