नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर वामपंथी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। वीडियो में सरमा को एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते हुए देखा गया था। हालांकि, विवाद के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव के समय मामलों का एक हिस्सा उच्चतम न्यायालय में उठता है, और इस मामले की सुनवाई की जाएगी।
हिमंत बिस्वा सरमा का मानहानि केस
सीएम सरमा ने कांग्रेस नेताओं जितेंद्र सिंह, भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के खिलाफ ₹500 करोड़ के हर्जाने के लिए मानहानि का केस किया। उन्होंने कहा कि नेताओं ने उनके खिलाफ झूठे, गलत इरादे वाले और बदनाम करने वाले आरोप लगाए।
वीडियो का विवाद
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यह वीडियो 7 फरवरी 2026 को असम बीजेपी की आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से शेयर किया गया।
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इसमें सीएम को दो व्यक्तियों की ओर निशाना साधते हुए दिखाया गया था।
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वीडियो पर व्यापक आक्रोश और निंदा हुई, और बाद में बीजेपी ने इसे हटा दिया।
वामपंथी नेताओं की याचिका
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेताओं ने याचिकाएं दायर की।
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याचिकाकर्ताओं ने एसआईटी गठित कर राज्य और केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच की मांग की।
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याचिकाओं में सीएम के कथित भड़काऊ भाषणों और बयानों का क्रमवार जिक्र किया गया है।
अतिरिक्त जानकारी
12 लोगों की तरफ से एक अलग याचिका पहले भी दायर की गई थी, जिसमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा विभाजनकारी टिप्पणियों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
