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सलमान की मौजूदगी और ठाकरे का हमला, RSS कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्षगांठ कार्यक्रम को लेकर सियासत तेज हो गई है। कार्यक्रम में मोहन भागवत के भाषा संबंधी बयान और बॉलीवुड अभिनेताओं की मौजूदगी पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग संघ के मंच पर फिल्मी सितारों की भागीदारी की आलोचना कर रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र में भागवत के बयान को लेकर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

सलमान खान की मौजूदगी पर संजय राउत का सवाल

शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने RSS कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा,“RSS अपने प्रचार के लिए केवल चुनिंदा मुस्लिम चेहरों को ही आगे क्यों रख रहा है? क्या मुस्लिम समाज से संवाद सिर्फ सलमान खान जैसे चर्चित नामों तक ही सीमित है?”

संजय राउत ने यह भी दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक हालात में, जब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS से जुड़ी विचारधारा की सरकार है, तो अगर किसी हस्ती को संघ से निमंत्रण मिलता है, तो सामाजिक दबाव में उसे स्वीकार करना पड़ता है और कार्यक्रम में शामिल होना मजबूरी बन जाता है।

नितेश राणे का पलटवार, बोले– सलमान उद्धव से ज्यादा हिंदू

संजय राउत के बयान पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने तीखा पलटवार किया।
राणे ने कहा,“सलमान खान उद्धव ठाकरे से ज्यादा हिंदू हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि“जो भाषा मोहन भागवत के लिए इस्तेमाल की जा रही है, वही भाषा उस AIMIM नेता के लिए क्यों नहीं बोली जाती जिसने मालेगांव को लेकर बयान दिया था? वहां बोलने की हिम्मत नहीं होती।”

ठाकरे बंधुओं का RSS पर हमला

RSS कार्यक्रम को लेकर ठाकरे बंधुओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आई है।
राज ठाकरे ने जहां कार्यक्रम में मशहूर हस्तियों की मौजूदगी पर सवाल उठाए, वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने संघ को सीधे निशाने पर लिया।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में RSS के इस कार्यक्रम की कड़ी आलोचना की है।

भाषा वाले बयान पर भागवत पर तीखा हमला

मोहन भागवत के भाषा संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज ठाकरे ने कहा,“मैं मोहनराव भागवत से कहना चाहता हूं कि लोग आपके प्रेम के कारण नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के डर से आए हैं। अप्रत्यक्ष राजनीति मत कीजिए। अगर करना ही है, तो उस सरकार के कान खींचिए जो पूरे देश में हिंदी थोप रही है, फिर हमें भाषा सिखाइए।”

राजनीतिक बहस और तेज

RSS के 100 साल पूरे होने का कार्यक्रम जहां संगठन के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, वहीं भाषा, राजनीति और मशहूर हस्तियों की भागीदारी को लेकर यह कार्यक्रम अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बयानबाज़ी और तेज होने के आसार हैं।

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