असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को एक और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में स्पेशल रिवीजन के दौरान लाखों ‘डाउटफुल वोटर्स’ यानी संदिग्ध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।सरमा के अनुसार यह कार्रवाई BJP कार्यकर्ताओं की ओर से दर्ज की गई शिकायतों के आधार पर की गई है।
चुनाव आयोग की अपडेट
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मंगलवार को असम के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी की गई।
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इसमें करीब 2.43 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए।
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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद और नाम हटाए जाने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को केवल शुरुआत बताया और कहा कि आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
बीजेपी कार्यकर्ताओं की भूमिका
सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि धमकियों और दबाव के बावजूद बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने संदिग्ध मतदाताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं।
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शिकायतों की जांच के बाद स्पेशल रिवीजन के तहत नाम हटाए गए।
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उनका कहना था कि जब SIR होगा, तो और अधिक नाम हटाए जाएंगे।
कुल मतदाता और विवादित बयान
अंतिम मतदाता सूची में असम में कुल मतदाताओं की संख्या 2.49 करोड़ रह गई, जो ड्राफ्ट सूची से 0.97 प्रतिशत कम है।मुख्यमंत्री ने एक और विवादित बयान देते हुए कहा:“अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम (अप्रवासियों) के खिलाफ यह युद्ध जारी रहेगा।”इससे साफ है कि असम सरकार का फोकस बाढ़ या रोजगार से अधिक अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्रित है।
