कानपुर: शहर में पुलिस ने एक बड़े फर्जी मार्कशीट और डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया। 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटी की लगभग 900 फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुई हैं। इस मामले में गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने रचा ड्रामा, पकड़ में आया गिरोह
कानपुर पुलिस ने गिरोह तक पहुंचने के लिए विशेष योजना बनाई। इंस्पेक्टर ने खुद को बेरोजगार युवक बताकर गिरोह के दलाल से संपर्क किया। दलाल ने उन्हें शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के ऑफिस पहुंचा दिया।
इंस्पेक्टर ने कहा कि उन्हें सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए हाईस्कूल की मार्कशीट चाहिए। शैलेंद्र ने 21 हजार रुपये में मार्कशीट दिलाने का प्रस्ताव रखा। इंस्पेक्टर ने 16 हजार रुपये एडवांस दिए। 15 दिन बाद जब इंस्पेक्टर शैलेंद्र के ऑफिस पहुंचे, तो पुलिस ने छापेमारी कर शैलेंद्र और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।
रैकेट कैसे काम करता था
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के पास विभिन्न यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां, ग्रेड शीट, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन बुकलेट और नकली मोहर थी। आरोपी 80 से अधिक फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर चुके थे।
गैंग के सदस्य फेल स्टूडेंट्स का डेटा हासिल करते थे और छात्रों को बिना परीक्षा दिए पास होने का वादा कर मोटी रकम वसूलते थे। इसके बाद ये दस्तावेज नौकरी या अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।
गिरोह के सरगना का दावा और फरार आरोपियों की तलाश
गिरोह का सरगना शैलेंद्र गिरफ्तारी के बाद दावा कर रहा है कि उसे फंसाया गया।पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि गैंग से जुड़े पांच और आरोपी फरार हैं—मयंक भारद्वाज (छतरपुर), मनीष उर्फ रवि (हैदराबाद), विनीत (गाजियाबाद), शेखू (भोपाल) और शुभम दुबे। इनकी तलाश के लिए पुलिस ने तीन टीमें लगा दी हैं।
SIT का गठन, यूनिवर्सिटी दस्तावेजों की जांच
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि इस गंभीर मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। टीम हर यूनिवर्सिटी के मूल प्रपत्रों की जांच कर रैकेट के दुरुपयोग का पता लगाएगी।
