नई दिल्ली। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा और इसे भारत में साफ देखा जा सकेगा। ज्योतिषियों और खगोलशास्त्रियों के अनुसार, यह समय धार्मिक, आध्यात्मिक और ध्यान संबंधी गतिविधियों के लिए अनुकूल है।
ग्रहण का समय और अवधि
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ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे
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पूर्ण चंद्र ग्रहण (खग्रास): शाम 4:34 बजे
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ग्रहण समाप्त: शाम 6:47 बजे
इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और यह दिन मंगलवार है। ज्योतिषियों का कहना है कि चंद्र ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति का प्रभाव जीवन और गतिविधियों पर पड़ता है। इस दौरान धार्मिक क्रियाओं और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।
धार्मिक और पारंपरिक महत्व
चंद्र ग्रहण के समय पारंपरिक और धार्मिक नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल प्रभावी रहेगा, जो ग्रहण से पहले और दौरान लागू होता है।
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ग्रहण काल में ध्यान, जप और पूजा-पाठ करने की सलाह दी जाती है।
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गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना अनिवार्य है।
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भोजन ग्रहण से पहले या बाद में किया जाना चाहिए, ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।
खगोलशास्त्र का दृष्टिकोण
विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान चंद्रमा लाल या गहरा नारंगी दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर ब्लड मून कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण पूरे भारत में देखा जा सकेगा, खासकर उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत में। चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी विशेष सुरक्षा चश्मे की जरूरत नहीं है।
ज्योतिषियों की सलाह
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ग्रहण काल में अनावश्यक बाहर जाने से बचें।
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बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करें।
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ध्यान, पूजा और जप का समय ग्रहण में बिताएं।
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भोजन ग्रहण के दौरान नहीं करें।
इस साल का पहला चंद्र ग्रहण धार्मिक, खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लोग इसे देखकर और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेकर ग्रहण का लाभ ले सकते हैं।
