नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी की सदस्यता पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। शुक्रवार (20 फरवरी) को वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए। यह मामला पिछले आठ साल से लंबित है और अदालत अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला सुना सकती है।
मामला और गवाह
राहुल गांधी पर यह मामला 4 अगस्त 2018 से चल रहा है। बीजेपी नेता विजय मिश्र ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था। इस केस में गवाहों के रूप में
-
विजय मिश्र,
-
पीतांबरपुर गांव के अनिल मिश्र,
-
मलिकपुर गाँव के रामचंद्र दुबे
ने अपनी गवाही दी है।
राहुल गांधी अब तक इस मामले में तीन बार पेश हो चुके हैं। शुक्रवार को उन्होंने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया।
संभावित सजा और सदस्यता पर असर
जानकारों के अनुसार, इस केस में दो साल तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोर्ट राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाती है, तो उनके लोकसभा सदस्यता रद्द होने का खतरा है।
कानून के मुताबिक, किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, राहुल गांधी और उनकी पार्टी के पास ऊपरी अदालत में अपील दाखिल करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
पक्ष और विपक्ष की दलीलें
परिवादी के वकील संतोष पांडेय का कहना है कि इस मामले में राहुल गांधी को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। वहीं राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित मामला बताया और कहा कि वे अपने मुवक्किल को बेगुनाह साबित करने के लिए सबूत पेश करेंगे।
