उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले की प्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी की कारीगरी) को कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की सुविधा मिलने के बाद नया जीवन मिला है। निज़ामाबाद क्षेत्र की यह पारंपरिक कला अब तेजी से देश-विदेश के बाजारों में अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
आज़मगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पकला के लिए जाना जाता है। यहां की ब्लैक पॉटरी अपनी अनोखी चमक और नक्काशी के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस कला में इस्तेमाल होने वाली चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होती है, जो इसे और खास बनाती है।
200 से अधिक कारीगर जुड़े
निज़ामाबाद क्षेत्र में 200 से ज्यादा कारीगर इस परंपरागत शिल्प से जुड़े हैं। ये कारीगर फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान और सजावटी वस्तुएं तैयार करते हैं। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
ODOP योजना से मिली नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई जा रही एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत ब्लैक पॉटरी को नया बाजार मिला है। इस योजना के जरिए कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
CFC से आसान हुआ उत्पादन
निज़ामाबाद ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव के अनुसार, CFC की स्थापना के बाद उत्पादन प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। यहां कच्चे माल से लेकर आधुनिक मशीनों तक सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे कारीगर समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ बड़े ऑर्डर पूरे कर पा रहे हैं।
पारंपरिक कला को मिला आधुनिक सहारा
ब्लैक पॉटरी की खासियत इसका गहरा काला रंग और आकर्षक डिजाइन है, जो विशेष तकनीक से तैयार किया जाता है। मिट्टी और वनस्पति घोल से रंग तैयार करने के बाद इसे खास तरीके से पकाया जाता है, जिससे इसकी चमक बढ़ती है।
