वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ की स्थापना के साथ एक नई पहल की शुरुआत हुई है। लगभग 700 किलोग्राम वज़न वाली यह विशेष घड़ी परंपरागत भारतीय समय गणना प्रणाली और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल प्रस्तुत करती है।
यह घड़ी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा भेंट की गई है। इसका उद्देश्य लोगों को भारत की प्राचीन ‘काल गणना’ पद्धति से परिचित कराना और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।
घड़ी का औपचारिक लोकार्पण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में आयोजित एक समारोह में किया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन ने इसे श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण बताया।
वैदिक समय गणना की झलक
‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ पारंपरिक 24 घंटे की प्रणाली से अलग काम करती है। इसमें दिन की शुरुआत आधी रात से नहीं, बल्कि सूर्योदय से मानी जाती है और इसे 30 ‘मुहूर्तों’ में विभाजित किया गया है। प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है।
यह घड़ी स्थानीय माध्य समय (Local Mean Time – LMT) के आधार पर समय दर्शाती है, जो सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है। इस कारण यह किसी विशेष स्थान के लिए अधिक सटीक मानी जाती है।
पंचांग से जुड़ी विस्तृत जानकारी
यह घड़ी केवल समय ही नहीं बताती, बल्कि वैदिक पंचांग के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को भी प्रदर्शित करती है, जैसे—
तिथि (चंद्र दिवस)
नक्षत्र (तारामंडल)
चंद्रमा की कलाएं
ग्रहण और त्योहारों की जानकारी
इसके साथ ही, यह घड़ी IST और GMT दोनों समय भी दिखाती है, जिससे पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रणालियों का संतुलन बना रहता है।
सटीकता को लेकर दावा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, मौसम विज्ञान और ज्योतिष से जुड़े अध्ययनों में यह पाया गया है कि वैदिक समय गणना पर आधारित कुछ भविष्यवाणियां आधुनिक तरीकों की तुलना में 20 से 23 प्रतिशत तक अधिक सटीक हो सकती हैं।
सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
मंदिर के अधिकारियों का मानना है कि इस घड़ी की स्थापना से आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा, बल्कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
