लखनऊ के कृष्णानगर सेक्टर-4 की 78 वर्षीय समाजसेविका वीना खुराना को साइबर जालसाजों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर चार दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और उनसे 8 लाख रुपये ठग लिए। हालांकि बैंककर्मी की सतर्कता से उनके 5 लाख रुपये बच गए।
पीड़िता के अनुसार, 4 मार्च को एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसमें खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले शख्स ने उनके आधार कार्ड से सिम कार्ड खरीदे जाने और उन्हें आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की बात कही। डराने-धमकाने के बाद वीडियो कॉल के जरिए उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” दिखाया गया और किसी को बताने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।
ठगों ने 4 से 7 मार्च तक उन्हें मानसिक दबाव में रखकर आरटीजीएस के जरिए 8 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद 5 लाख रुपये और मांगने पर जब पीड़िता बैंक पहुंचीं, तो बैंककर्मी को शक हुआ। पूछताछ में सच्चाई सामने आई और उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की सलाह दी।
31 मार्च को पीड़िता ने साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही है।
कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से:
- अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें
- खुद को पुलिस/एजेंसी बताने वालों से सतर्क रहें
- डराने-धमकाने वाले कॉल तुरंत काटें
- किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
