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भारत का पहला AI-असिस्टेड ‘लिवर पूप ऐप’ लॉन्च, नवजातों की जान बचाने में बनेगा मददगार

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि सामने आई है। संस्थान के बाल हेपेटोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने तीन वर्षों के शोध और डेढ़ साल की मेहनत के बाद भारत का पहला AI-असिस्टेड मोबाइल एप “लिवर पूप” विकसित किया है। इसका उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. सीएम सिंह द्वारा किया गया।

यह अत्याधुनिक ऐप नवजात शिशुओं (0–1 वर्ष) में होने वाली गंभीर बीमारी बिलीरी एट्रेसिया की शुरुआती पहचान करने में सक्षम है। उपयोगकर्ता केवल शिशु के मल की फोटो लेकर ऐप पर अपलोड करता है, जिसके बाद AI तकनीक तुरंत यह बताती है कि स्थिति सामान्य है या खतरे का संकेत।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी में यदि जन्म के 60 दिनों के भीतर सर्जरी हो जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन 90 दिनों के बाद स्थिति गंभीर हो जाती है और लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में यह ऐप समय रहते पहचान कर नवजातों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

“लिवर पूप” ऐप की खास बात यह है कि यह 40 भाषाओं में उपलब्ध है, जिनमें 18 भारतीय और 22 विदेशी भाषाएं शामिल हैं। इससे यह SAARC, ASEAN और अफ्रीकी देशों सहित दुनिया भर में उपयोगी साबित हो सकता है।

यह ऐप पूरी तरह मुफ्त है और इसके जरिए रियल-टाइम डेटा स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाया जा सकता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके उपयोग से लीवर ट्रांसप्लांट के मामलों में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

इस उपलब्धि पर डॉ. पीयूष उपाध्याय ने कहा कि उनका उद्देश्य जन्म के तुरंत बाद बीमारी की पहचान सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे और हर परिवार को समय पर मदद मिल सके।

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