लखनऊ, 09 अप्रैल। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुनकर केवल परंपरा के संरक्षक ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी हैं। ऐसे में उनकी आय, सम्मान और आजीविका की स्थिरता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हथकरघा विभाग की समीक्षा बैठक में बुनकरों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमत, आधुनिक तकनीक की कमी और सीमित बाजार पहुंच जैसी चुनौतियों का समाधान एक क्लस्टर आधारित समन्वित प्रणाली से ही संभव है। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में करीब 1.99 लाख बुनकर कार्यरत हैं और देश में इस क्षेत्र में प्रदेश छठवें स्थान पर है। कालीन, दरी और मैट उत्पादन में राज्य अग्रणी है, जबकि बेडशीट और फर्निशिंग उत्पादों में भी मजबूत पकड़ है। वर्ष 2024-25 में देश के कुल हथकरघा निर्यात ₹1178.93 करोड़ में से ₹109.40 करोड़ का योगदान उत्तर प्रदेश का रहा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बुनकर बहुल क्षेत्रों में क्लस्टर विकसित किए जाएं, जहां उत्पादन से लेकर डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक की पूरी वैल्यू चेन एक ही ढांचे में उपलब्ध हो। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि बुनकरों की आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि बुनकरों को आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरण और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। साथ ही, ‘डिजाइनर-कम-मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव’ और ‘डिजाइन हाउस/एक्सपोर्ट एजेंसी’ जैसे तंत्र को मजबूत कर बड़े बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित की जाए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स के उपयोग पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बुनकर सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा, पॉवरलूम बुनकरों के बिजली बिल में राहत और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित और व्यावहारिक नीति के जरिए बुनकरों को वास्तविक लाभ पहुंचाया जाएगा, जिससे न केवल उनकी आजीविका मजबूत होगी, बल्कि प्रदेश की पारंपरिक बुनकरी को भी नई दिशा मिलेगी।
