लखनऊ। उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नई श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। Yogi Adityanath सरकार ने राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा जारी कर दिया है, जिसे सार्वजनिक डोमेन में रखकर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियमों को मई में अधिसूचित किए जाने की संभावना है।
नई व्यवस्था के तहत 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को खत्म कर चार प्रमुख संहिताओं—वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020—में समाहित किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और श्रमिकों को अधिक सुरक्षा प्रदान करना है।
सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है। अब कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन होगा, जिससे भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और बोनस जैसी सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। साथ ही प्रबंधकीय और सुपरवाइजरी कर्मचारी भी अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में आएंगे, जबकि ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता पर तय की गई है।
नई वेतन संहिता के तहत सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे नीचे राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा वेतन का भुगतान हर महीने सात तारीख तक करना अनिवार्य होगा और ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान देना होगा। समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रावधान भी लागू होगा।
औद्योगिक संबंधों में भी बदलाव किए गए हैं। अब 300 या उससे अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी, जबकि पहले यह सीमा 100 थी। हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस अनिवार्य होगा और 20 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति बनानी होगी।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को इसमें शामिल किया गया है। कंपनियों को अपने वार्षिक कारोबार का 1-2 प्रतिशत सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। साथ ही कार्यस्थल आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटना को भी कार्य से जुड़ा माना जाएगा।
नई व्यवस्था में निरीक्षक की भूमिका को ‘इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर’ के रूप में बदला गया है, जिससे छोटे उल्लंघनों पर पहले सुधार का अवसर दिया जाएगा। वहीं गंभीर मामलों में 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इन श्रम संहिताओं के लागू होने से एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा, पारदर्शिता और सुविधाएं मिलेंगी।
