अक्सर लोग नींद से जुड़ी कुछ असामान्य आदतों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ये संकेत गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) की ओर भी इशारा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लगातार देर रात तक नींद न आना, बिस्तर पर जाते ही दिमाग का अत्यधिक सक्रिय हो जाना, रात में बार-बार नींद खुलना, सुबह उठने में कठिनाई महसूस होना या पर्याप्त नींद के बावजूद दिनभर थकान और सुस्ती बनी रहना जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे केवल खराब दिनचर्या या तनाव का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ADHD का प्रभाव केवल ध्यान और व्यवहार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिद्म को भी प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से व्यक्ति का स्लीप पैटर्न असंतुलित हो जाता है और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ता है।
Praveen Gupta के अनुसार यदि लंबे समय से नींद से जुड़ी ये समस्याएं बनी हुई हैं और इसके साथ ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, लगातार बेचैनी या चीजें भूलने की आदत भी बढ़ रही है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सही पहचान और उपचार शुरू करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की कार्यक्षमता, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए यदि आपकी नींद लगातार प्रभावित हो रही है और दिमाग को आराम नहीं मिल पा रहा है, तो अपनी आदतों का मूल्यांकन करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।
