पीरियड्स महिलाओं के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ होने वाला दर्द और ऐंठन कई महिलाओं के लिए बेहद तकलीफदेह साबित होता है। कई बार यह दर्द इतना अधिक होता है कि दैनिक कामकाज भी प्रभावित होने लगता है। हालांकि, हर महिला दर्द निवारक दवाओं का सहारा नहीं लेना चाहती। ऐसे में आयुर्वेद और घरेलू उपाय राहत का विकल्प बन सकते हैं।
कैलाश दीपक हॉस्पिटल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रेनू चावला के अनुसार, रसोई में मौजूद कुछ सामान्य मसाले पीरियड्स के दर्द और ऐंठन को कम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। ये मसाले न केवल प्राकृतिक हैं, बल्कि लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी उपयोग किए जाते रहे हैं।
पीरियड्स के दौरान दर्द क्यों होता है?
मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को चिकित्सकीय भाषा में डिसमेनोरिया कहा जाता है। यह समस्या लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं को जीवन के किसी न किसी चरण में प्रभावित करती है। यह दर्द आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने से पहले या शुरुआती दिनों में होता है और कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायन होते हैं, जो गर्भाशय की परत से निकलते हैं। इनका स्तर बढ़ने पर गर्भाशय की मांसपेशियां अधिक तीव्रता से सिकुड़ती हैं, जिससे दर्द और ऐंठन महसूस होती है। कुछ मामलों में एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड और एडेनोमायोसिस जैसी समस्याएं भी दर्द को बढ़ा सकती हैं।
. हल्दी: सूजन और दर्द दोनों पर असरदार
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व माना जाता है। यह प्रोस्टाग्लैंडिन बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे दर्द और ऐंठन की तीव्रता कम हो सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पीरियड्स शुरू होने से पहले और उसके दौरान हल्दी का नियमित सेवन किया जाए। बेहतर अवशोषण के लिए इसे काली मिर्च और किसी स्वस्थ वसा (फैट) के साथ लेना अधिक फायदेमंद माना जाता है।
. अदरक: प्राकृतिक पेन रिलीवर
अदरक को पीरियड्स दर्द के लिए सबसे प्रभावी घरेलू उपचारों में गिना जाता है। इसमें मौजूद जिंजरोल्स और शोगोल्स गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करते हैं।
कई शोधों में पाया गया है कि अदरक दर्द कम करने में कुछ सामान्य दर्द निवारक दवाओं जितना प्रभावी हो सकता है। पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों में अदरक की चाय या सीमित मात्रा में अदरक पाउडर का सेवन राहत पहुंचा सकता है। यह मतली और उलझन जैसी समस्याओं को भी कम करता है।
दालचीनी: दर्द और ब्लीडिंग दोनों में मददगार
दालचीनी में एंटीस्पास्मोडिक और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में सहायक होते हैं।
अध्ययनों के अनुसार, दालचीनी मासिक धर्म के दौरान दर्द की तीव्रता कम करने के साथ-साथ अत्यधिक ब्लीडिंग और मतली में भी राहत दे सकती है। इसे दूध या गर्म पानी में मिलाकर सेवन किया जा सकता है।
सौंफ: ऐंठन और ब्लोटिंग से राहत
सौंफ में मौजूद एनेथोल नामक तत्व मांसपेशियों को आराम देने का काम करता है। यह गर्भाशय के अत्यधिक संकुचन को कम करके दर्द को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
सौंफ की चाय पीना या भोजन के बाद सौंफ चबाना पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लोटिंग, गैस और पाचन संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है।
. केसर: दर्द के साथ मूड भी बेहतर बनाए
केसर में मौजूद क्रोसिन और सेफ्रानल तत्व सूजन कम करने और मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी थोड़ी मात्रा भी पीरियड्स के दर्द और प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
हालांकि घरेलू उपाय सामान्य पीरियड्स दर्द में राहत दे सकते हैं, लेकिन यदि दर्द अत्यधिक हो, हर महीने असहनीय स्तर तक पहुंच जाए, अत्यधिक रक्तस्राव हो या सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगें, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
