रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई, तो किसी ने अपनी बहन। कोई अपने घर का इकलौता बेटा था, तो कोई बूढ़े मां-बाप का सहारा। इस बहुमंजिला इमारत में भड़की आग ने सिर्फ जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों के सुनहरे भविष्य को भी हमेशा के लिए राख कर दिया।
इसी हादसे में एक ऐसा जोड़ा भी था, जो साथ काम करता था और बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने वाला था। नीलेश और अनामिका ने अपनी नई जिंदगी को लेकर कई खूबसूरत सपने संजोए थे। पिछले ही हफ्ते दोनों का रोका हुआ था और अगले सात दिनों में शादी की बाकी रस्मों को तय करने के लिए ट्रेन की टिकटें भी बुक हो चुकी थीं। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। इस दर्दनाक हादसे ने दोनों की जिंदगी ही छीन ली।

जब इस अग्निकांड की जानकारी नीलेश के भाई को मिली तो वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। वहां मौजूद मीडिया कर्मियों से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका भाई और उनकी होने वाली भाभी, दोनों इसी बिल्डिंग में काम करते थे। उनकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।
उन्होंने बताया कि अनामिका के माता-पिता खास तौर पर अपनी बेटी के रिश्ते की बात आगे बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे। दोनों परिवारों की वह मुलाकात बेहद खास और यादगार रही थी। हंसी-खुशी के माहौल में दोनों का रोका हुआ और अगले साल शादी करने का फैसला भी पक्का हो गया। नीलेश के भाई अभिषेक बताते हैं कि अनामिका इतनी मिलनसार और स्नेही स्वभाव की थी कि पहली ही मुलाकात में वह पूरे परिवार की चहेती बन गई थी। रोका होने के बाद घर का हर सदस्य शादी की तैयारियों और आने वाले खुशियों भरे दिनों के सपने देखने लगा था।
अभिषेक ने बताया कि आगे की रस्मों और शादी के कार्ड की छपाई जैसी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए पूरे परिवार ने अगले ही हफ्ते पश्चिम बंगाल जाने की योजना बनाई थी। इसके लिए ट्रेन की टिकटें भी बुक करा ली गई थीं। हर कोई आने वाले जश्न का इंतजार कर रहा था।
उन्होंने बताया कि नीलेश को इसी साल नौकरी में तरक्की मिली थी। इसके बाद वह दिन-रात मेहनत कर रहा था और पैसे जोड़ रहा था, ताकि अपनी शादी का खर्च खुद उठा सके। उसका एक ही सपना था कि शहर में बन रहा उसका नया घर जैसे ही पूरा हो, वह अपनी दुल्हन अनामिका का गृह प्रवेश उसी घर में कराए। वह अपने नए आशियाने और नई जिंदगी को लेकर बेहद उत्साहित था।

लेकिन नियति को शायद यह मंजूर नहीं था। जिन हाथों में कुछ महीनों बाद वरमाला होनी थी, वे हमेशा के लिए खामोश हो गए। जिन सपनों से दोनों परिवारों की आंखें चमक रही थीं, वे एक पल में बिखर गए। अलीगंज अग्निकांड ने सिर्फ दो जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि दो परिवारों की खुशियां, उम्मीदें और भविष्य भी उनसे छीन लिया। अब पीछे रह गई हैं तो सिर्फ यादें, अधूरे सपने और अपनों को खोने का कभी न भरने वाला दर्द।
