लखनऊ: अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर अग्निकांड की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) को निलंबित किए जाने के फैसले का विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध किया है। समिति ने इस कार्रवाई को तथ्यों के विपरीत, अन्यायपूर्ण और एक अधिकारी को बलि का बकरा बनाने का प्रयास बताया है।
समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि घटना की निष्पक्ष और तकनीकी जांच पूरी किए बिना अधिशासी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन से निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
संघर्ष समिति का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि संबंधित भवन में विद्युत सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और आवश्यक इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट भी नहीं कराया गया था। एसआईटी जांच के दौरान विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारी यह रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं कर सके कि भवन का सुरक्षा ऑडिट कब हुआ था या घटना से पहले विद्युत सुरक्षा का निरीक्षण कब किया गया था।
समिति ने आरोप लगाया कि यदि भवन में विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अधूरी रही और संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया, तो इन सभी पहलुओं की जिम्मेदारी तय किए बिना केवल विद्युत वितरण निगम के एक अभियंता को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
20 किलोवाट भार पहले ही स्वीकृत था
संघर्ष समिति ने निलंबन आदेश में लगाए गए स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग के आरोपों पर भी सवाल उठाए। समिति के अनुसार उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि वर्ष 2016 में परिसर का विद्युत भार विधिवत बढ़ाकर 20 किलोवाट किया जा चुका था।
समिति ने स्पष्ट किया कि अप्रैल, मई और जून में भार वृद्धि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मासिक बिलिंग और मास्टर डेटा के माध्यम से बाद में प्राप्त होती है। नियमानुसार अगले माह उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में जुलाई से पहले बढ़े हुए भार के आधार पर किसी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना नियमों के अनुरूप नहीं है।
भवन के अंदर की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत वितरण निगम की जिम्मेदारी उपभोक्ता को विधिवत बिजली कनेक्शन देना और निर्धारित मानकों के अनुरूप विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वहीं भवन के अंदर की वायरिंग, विद्युत उपकरणों की गुणवत्ता, विद्युत सुरक्षा प्रमाणन, अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन और समय-समय पर सुरक्षा परीक्षण की जिम्मेदारी भवन स्वामी और संबंधित नियामक एवं सुरक्षा एजेंसियों की होती है।
समिति का कहना है कि इन जिम्मेदारियों की अनदेखी कर केवल एक अभियंता पर कार्रवाई करना वास्तविक कारणों से ध्यान हटाने जैसा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अलीगंज अग्निकांड की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। समिति ने कहा कि जांच में विद्युत सुरक्षा निदेशालय, अग्निशमन विभाग, भवन स्वामी, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी समग्र समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) का निलंबन तत्काल वापस लेने और बिना जांच किसी भी अभियंता को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की गई है।
