प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शुमार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की कैंटीन में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शताब्दी फेज-1 की दूसरी मंजिल स्थित कैंटीन में बिक्री के लिए रखे केक, बन और क्रीम रोल पर कॉकरोच रेंगते हुए दिखाई दिए।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन खाद्य पदार्थों की बिक्री लगातार जारी रही और मरीजों के तीमारदारों के साथ-साथ मेडिकल छात्र एवं अस्पताल कर्मचारी भी इन्हें खरीदते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कैंटीन में रखी केक की ट्रे में कई कॉकरोच मौजूद थे।
वहीं, बन और क्रीम रोल पर भी कॉकरोच चलते हुए साफ दिखाई दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल परिसर में संचालित कैंटीनों की स्वच्छता व्यवस्था और फूड सेफ्टी मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मरीजों और तीमारदारों की सेहत पर मंडराया खतरा
अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में इस तरह की लापरवाही को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहद गंभीर मानते हैं। KGMU में प्रतिदिन हजारों मरीज, उनके परिजन, डॉक्टर, मेडिकल छात्र और स्वास्थ्यकर्मी भोजन एवं नाश्ते के लिए कैंटीन का उपयोग करते हैं। ऐसे में दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
विशेष रूप से कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण मानी जा रही है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि अस्पताल परिसर में संचालित कैंटीनों की साफ-सफाई, खाद्य गुणवत्ता और फूड सेफ्टी मानकों की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
यदि समय-समय पर निरीक्षण होता है, तो कॉकरोचयुक्त खाद्य सामग्री आखिर बिक्री काउंटर तक कैसे पहुंच गई।
KGMU प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद KGMU प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि कैंटीन का वीडियो संज्ञान में आया है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
उन्होंन कहा, “किसी की भी सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। यदि जांच में कैंटीन संचालक की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साफ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना अनिवार्य है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
अन्य कैंटीनों की भी हो सकती है जांच
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कैंटीन संचालक के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ अस्पताल परिसर में संचालित अन्य कैंटीनों की भी स्वच्छता, खाद्य गुणवत्ता और फूड सेफ्टी मानकों की व्यापक जांच कराई जा सकती है।
यह मामला सरकारी अस्पतालों की कैंटीनों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
