प्रदेश में गोवंश के लिए हरे चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हरित चारा अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही चारागाहों के विकास, पेयजल, पशु चिकित्सा और संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
प्रदेश की 58,115 ग्राम पंचायतों में 61,118.85 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 6,287 स्थायी और अस्थायी गो-आश्रय स्थलों में से 5,050 को 10,421.45 हेक्टेयर गोचर भूमि से जोड़ा गया है, जिससे गोवंश के लिए नियमित हरे चारे की व्यवस्था की जा सके।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, गोचर भूमि पर हरित चारा उगाने के मामले में हरदोई प्रदेश में पहले स्थान पर है। जिले में 462.76 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित चारा उगाया गया है। इसके बाद फतेहपुर, रायबरेली, संभल, आगरा, अलीगढ़, बहराइच, बाराबंकी, फिरोजाबाद और हमीरपुर का स्थान है।
चारे की कमी वाले जिलों, विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र, के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। जरूरत पड़ने पर अधिक उत्पादन वाले जिलों से चारा और भूसा उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, अधिसूचित वन क्षेत्रों से घास और अन्य चारे की व्यवस्था भी की जा सकती है।
पशुओं को असंतुलित चारे से होने वाली नाइट्रेट और नाइट्राइट विषाक्तता से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में तालाब और पोखरों को नहर या नलकूप से भरने तथा जरूरत पड़ने पर वाटर टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में संचालित 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। आपात स्थिति में पशुओं के तत्काल उपचार के लिए इनकी सेवाएं 1962 टोल-फ्री नंबर पर 24 घंटे उपलब्ध हैं।
