Homeउत्तर प्रदेशयोगी सरकार के प्रयासों से यूपी में बढ़ रही बाघों की संख्या,...

योगी सरकार के प्रयासों से यूपी में बढ़ रही बाघों की संख्या, 2022 में 205 हुए टाइगर

उत्तर प्रदेश में बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब बाघों की बढ़ती संख्या के रूप में दिखाई दे रहा है।

वर्ष 2018 में हुई बाघ गणना में प्रदेश में 173 बाघ दर्ज किए गए थे, जबकि 2022 की गणना में यह संख्या बढ़कर 205 पहुंच गई। योगी सरकार की ओर से बाघों के संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदेश में वर्तमान में चार टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें पीलीभीत, दुधवा, अमानगढ़ और रानीपुर टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बाघों के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

लगातार बढ़ रही बाघों की संख्या

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी के मुताबिक, प्रदेश में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2006 में यूपी में 109 बाघ दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2010 में 118, 2014 में 117, 2018 में 173 और वर्ष 2022 की गणना में कुल 205 बाघ पाए गए।

देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं। उत्तर प्रदेश का रानीपुर टाइगर रिजर्व देश का 53वां टाइगर रिजर्व है। प्रदेश में चार टाइगर रिजर्व होना राज्य की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में ‘बाघ मित्र’ की अहम भूमिका

बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वर्ष 2019 में पीलीभीत में ‘बाघ मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाघों और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी की तत्काल सूचना वन विभाग तक पहुंचाकर अप्रिय घटनाओं को रोकना है।

कार्यक्रम की प्रभावशीलता को देखते हुए अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में ‘बाघ मित्र’ एप भी लॉन्च किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के इस प्रयास की सराहना कर चुके हैं।

पीलीभीत में 120 लोग बने ‘बाघ मित्र’

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह के अनुसार, जंगल के आसपास के गांवों के 120 लोग ‘बाघ मित्र’ के रूप में जुड़े हुए हैं। इनमें युवा और बुजुर्गों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं। जंगल से करीब पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले ग्रामीणों को वन विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया गया है।

यदि जंगल से बाहर किसी बाघ या अन्य जंगली जानवर की मौजूदगी दिखाई देती है तो ‘बाघ मित्र’ तुरंत व्हाट्सएप ग्रुप और फोन के जरिए वन विभाग को सूचना देते हैं। इसके बाद विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी शुरू करती है।

‘बाघ मित्र’ एप के जरिए ग्रामीण जानवर की तस्वीर और उसकी लोकेशन भी साझा कर सकते हैं। इससे वन विभाग को जानवर की पहचान करने और उसकी जंगल से दूरी का पता लगाने में मदद मिलती है। यदि बाघ खेत या आबादी के करीब होता है तो विभाग की मॉनीटरिंग टीम को तत्काल सक्रिय किया जाता है।

29 जुलाई को रानीपुर टाइगर रिजर्व में होगा मुख्य आयोजन

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर 29 जुलाई को उत्तर प्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य राज्यस्तरीय आयोजन रानीपुर टाइगर रिजर्व के तत्वावधान में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, कर्वी, चित्रकूट में होगा।

इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Securing the Future of Tigers with Indigenous Peoples and Local Communities at the Heart” रखी गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ वन राज्यमंत्री केपी मलिक करेंगे।।

आयोजन के दौरान जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ स्कूलों में चित्रकला, पेंटिंग, निबंध, टी-शर्ट पेंटिंग, क्विज और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा रानीपुर टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण और लोगो का अनावरण किया जाएगा।

राज्यस्तरीय वन्यजीव फोटोग्राफी प्रतियोगिता और छायाचित्र प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। नेचर गाइड्स को सम्मानित करने के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

RELATED ARTICLES

Most Popular